हिंदी साहित्य में नवगीत

हिन्दी पद्य साहित्य

हिंदी साहित्य में नवगीत, हिन्दी काव्य-धारा की एक नवीन विधा है। इसकी प्रेरणा सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई और लोकगीतों की समृद्ध भारतीय परम्परा से है। हिंदी साहित्य के प्रमुख नवगीतकार में सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, ठाकुर प्रसाद सिंह, शान्ति सुमन, माहेश्वर तिवारी, सुभाष वशिष्ठ और कुमार रवीन्द्र नाम प्रमुख हैं . “नवगीत” एक यौगिक … Read more

हिन्दी साहित्य में ग़ज़ल

हिन्दी पद्य साहित्य

हिन्दी साहित्य में ग़ज़ल को सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह हिन्दी साहित्य की एक सशक्त और अत्यन्त लोकप्रिय काव्य – विधा है। ग़ज़ल की शुरुआत ग़ज़ल की शुरुआत लगभग पन्द्रह सौ वर्ष पहले अरबी भाषा में हुई थी। अरबी में मुख्य रूप से कसीदे ( राजाओं की प्रशंसा में लिखे जाने वाले काव्य ) और … Read more

दलित कविता का विकास

हिन्दी पद्य साहित्य

दलित कविता का विकास संत रैदास को हिंदी का प्रथम दलित कवि माना जाता है। आधुनिक युग के दलित कवियों में प्रथम नाम हीरा डोम और स्वामी अच्युतानंद का नाम लिया जाता है। दलित विद्वानों ने सन 1914 ईस्वी में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत को हिंदी की प्रथम … Read more

आधुनिक हिन्दी साहित्य में पद्य का विकास

hindi sahitya notes

आधुनिक हिन्दी साहित्य में पद्य का विकास आधुनिक काल की कविता के विकास को निम्नलिखित धाराओं में बांट सकते हैं। १. नवजागरण काल (भारतेंदु युग) 1850 ईस्वी से 1900 ईस्वी तक२. सुधार काल (द्विवेदी युग) 1900 ईस्वी से 1920 ईस्वी तक३. छायावाद 1920 ईस्वी से 1936 ईस्वी तक४. प्रगतिवाद प्रयोगवाद 1936 ईस्वी से 1953 ईस्वी … Read more

जैन साहित्य की सामान्य विशेषताएँ

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अपभ्रंश साहित्य को जैन साहित्य कहा जाता है, क्योंकि अपभ्रंश साहित्य के रचयिता जैन आचार्य थे। जैन कवियों की रचनाओं में धर्म और साहित्य का मणिकांचन योग दिखाई देता है। जैन कवि जब साहित्य निर्माण में जुट जाता है तो उस समय उसकी रचना सरस काव्य का रूप धारण कर लेती है और जब वह … Read more

विनय-पत्रिका पद का शब्दार्थ सहित व्याख्या

tulsidas

विनय-पत्रिका- श्रीगणेश-स्तुति का शब्दार्थ सहित व्याख्या
राग बिलावल

कृष्णभक्ति शाखा के कवि

हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

कृष्णभक्ति शाखा के कवि सूरदास, नंददास, कृष्णदास, परमानंद, कुंभनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी, गोविन्दस्वामी, हितहरिवंश, गदाधर भट्ट, मीराबाई, स्वामी हरिदास, सूरदास-मदनमोहन, श्रीभट्ट, व्यास जी, रसखान, ध्रुवदास, चैतन्य महाप्रभु । रचनाएँ 1. सूरसागर   2. सूरसारावली   3. साहित्य लहरी

सगुण भक्ति उद्भव एवं विकास

हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

हिन्दी साहित्य के इतिहास में भक्ति काल महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को ‘पूर्व मध्यकाल’ भी कहा जाता है। इसकी समयावधि 1375 वि.सं से 1700 वि.सं तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग है जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्यामसुन्दर दास ने स्वर्णयुग, आचार्य राम चंद्र … Read more

निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा)

हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

ज्ञानाश्रयी शाखा के भक्त-कवि ‘निर्गुणवादी’ थे, और नाम की उपासना करते थे। गुरु का वे बहुत सम्मान करते थे, और जाति-पाति के भेदों को नहीं मानते थे। वैयक्तिक साधना को वह प्रमुखता देते थे। मिथ्या आडंबरों और रूढियों का विरोध करते थे। साधारण जनता पर इन संतों की वाणी का ज़बरदस्त प्रभाव पड़ा। इन संतों … Read more

अंतः सलीला कामायनी पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अंतः सलीला कामायनी पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. अंतः सलीला के रचनाकार हैं-1. अज्ञेय✔2. मुक्तिबोध3. पंत4. महादेवी वर्मा 2. अंतः सलीला का रचनाकाल है-1. 1957 ई.2. 1958 ई.3. 1959 ई.✔4. 1960 ई. 3. अंतः सलीला किस रेलयात्रा के दौरान लिखी गई-1. दिल्ली से इलाहाबाद2. आगरा से इलाहाबाद3. आगरा से दिल्ली4. इलाहाबाद से दिल्ली✔5. इलाहाबाद से आगरा … Read more

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