हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास

Mahila Sahitykaar

हिन्दी की प्रथम महिला उपन्यासकार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ को माना जाता है। इन्होंने सन् 1890 ई. में ‘सुहासिनी’ नामक उपन्यास लिखा। ब्रजरत्नदास अनुसार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ का मूल नाम मल्लिका देवी था। हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास निम्नांकित हैं- उषा प्रियंवदा- (1) पचपन खम्भे लाल दीवारें (1961), (2) रुकोगी नहीं राधिका (1967), (3) … Read more

हिंदी डायरी साहित्य 

hindi sahitya notes

हिन्दी डायरी विद्या का प्रवर्तन श्री राम शर्मा कृत ‘सेवाग्राम की डायरी’ (1946) से माना जाता है। हिन्दी डायरी लेखक व डायरी निम्नलिखित हैं- लेखक डायरी घनश्यामदास बिड़ला डायरी के पन्ने धीरेंद्र वर्मा मेरी कालिज डायरी (1954) सुन्दरलाल त्रिपाठी दैनंदिनी सियारामशरण गुप्त दैनिकी उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ ज्यादा अपनी कम परायी (1959) हरिवंश राय बच्चन प्रवासी की … Read more

हिन्दी के प्रमुख उपन्यास और उनके प्रमुख पात्र

Hindi Upnyaas

मनोहर श्याम जोशी अपने उपन्यासों को ‘गप्प बाइस्कोप’ कहते है। ‘मुन्नी मोबाइल’, ‘तीसरी ताली’ उपन्यास के लिए सन् 2012 का ‘इन्दु अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान’ प्रदान किया गया है। ‘ग्लोबल गाँव का देवता’ उपन्यास रणेन्द्र ने लिखा है। इसमें आदिवासी समाज का चित्रण है। इला डालमिया ने कवि अज्ञेय के जीवन पर केन्द्रित ‘छत पर अपर्णा’ … Read more

अंधा युग गीतिनाट्य का कथासार

अंधा युग गीतिनाट्य का कथासार स्थापना- स्थापना के अन्तर्गत नाटककार ने मंगलाचरण, उद्घोषणा और अपनी कृति के वर्ण्य विषय का उल्लेख किया है। उद्घोषणा में उसने बताया है कि प्रस्तुत कृति का वर्ण्य विषय विष्णु पुराण से लिया गया है, जिसमें भविष्यवाणी करते हुए लिखा है कि उस भविष्य में सब लोग तथा उनके धर्म-अर्थ … Read more

दलित कविता का विकास

हिन्दी पद्य साहित्य

दलित कविता का विकास संत रैदास को हिंदी का प्रथम दलित कवि माना जाता है। आधुनिक युग के दलित कवियों में प्रथम नाम हीरा डोम और स्वामी अच्युतानंद का नाम लिया जाता है। दलित विद्वानों ने सन 1914 ईस्वी में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत को हिंदी की प्रथम … Read more

रस संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रस संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1 रस सूत्र किस आचार्य ने दिया है ?1 भरतमुनि✔️2 भामह3 मम्मट4 पंडितराज जगनन्नाथ 2 रस सूत्र के व्याख्याता आचार्यों की संख्या है –1, 4✔️2, 63, 54, 8 3 उत्प्तति वाद किस आचार्य का मत कहा जाता है –1 भट्टनायक2 भट्टलोलट✔️3 अभिनवगुप्त4 शंकुक 4 अनुमिति का सम्बन्ध है –1 साधारणीकरण2 चित्रतुरंग … Read more

अंधा युग गीतिनाट्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अंधा युग गीतिनाट्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1)अंधायुग के कथानक का मूल स्त्रोत महाभारत की कौन सी घटनाएँ है???उत्तराद्ध🎯पूर्वाद्धदोनोंइनमें से कोई नही।2)अंधायुग में कितने अंक है—35🎯79 3)अंधायुग का चौथा अंक है??पशु का उदयगांधारी का श्राप🎯अश्वत्थामा का अद्ध सत्यविजय एक क्रमिक आत्महत्या 4)अंधायुग का प्रकाशन हुआ है??195119521954🎯1955 5)अंधायुग किस विधा की रचना है–काव्यनाटकगीतिनाट्य🎯लोकगाथा 6)अंधायुग का नायक कौन है—युधिष्ठिरअर्जुनअश्वत्थामा🎯युयुत्सु … Read more

आधुनिक हिन्दी साहित्य में गद्य का विकास

हिन्दी गद्य साहित्य

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। ईश्वर के साथ साथ मानव को समान महत्व दिया गया। भावना के साथ साथ विचारों को पर्याप्त प्रधानता मिली। पद्य के साथ साथ गद्य का भी विकास हुआ । आधुनिक हिन्दी साहित्य में गद्य का विकास हिन्दी गद्य के विकास … Read more

हिन्दी गद्य के विकास

हिन्दी गद्य साहित्य

हिन्दी गद्य के विकास के विभिन्न सोपान अध्ययन की दृष्टि से हिंदी गद्य साहित्य के विकास को इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है। हिन्दी गद्य के विकास को विभिन्न सोपानों में विभक्त किया जा सकता है- (1) पूर्व भारतेंदु युग(प्राचीन युग): 13 वी सदी से 1868 ईस्वी तक.(2) भारतेंदु युग(नवजागरण काल): 1868ईस्वी से 1900 … Read more

हिंदी गद्य के आरंभ

हिंदी गद्य के आरंभ कुछ विद्वान हिंदी गद्य के आरंभ 19वीं सदी से ही मानते हैं जबकि कुछ अन्य हिन्दी गद्य की परम्परा को 11वीं-12वीं सदी तक ले जाते हैं। हिंदी गद्य के आरंभ को लेकर विद्वानों में मतभेद आधुनिक काल से पूर्व हिन्दी गद्य की निम्न परम्पराएं मिलती हैं- (1) राजस्थानी में हिन्दी गद्य:- … Read more

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