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हिंदी साहित्य

हिंदी भारत और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में तलाशी जा सकती हैं। परंतु हिन्दी साहित्य की जड़ें मध्ययुगीन भारत की अवधी, मागधी , अर्धमागधी तथा मारवाड़ी जैसी भाषाओं के साहित्य में पायी जाती हैं। हिंदी में गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ। हिंदी ने अपनी शुरुआत लोकभाषा कविता के माध्यम से की। हिंदी का आरंभिक साहित्य अपभ्रंश में मिलता है।

हिन्दी के जीवनीपरक उपन्यास

हिन्दी के जीवनीपरक उपन्यास HINDI SAHITYA ‘भारती का सपूत'— डॉ. रांगेय राघव (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पर, हिन्दी में प्रथम जीवनीपरक उपन्यास, 1954, प्रथम संस्करण), ‘रत्ना की बात' — डॉ. रांगेय राघव (तुलसी के जीवन पर, 1957, द्वितीय संस्करण) 

विविध भक्ति सम्प्रदाय

विविध भक्ति सम्प्रदाय हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल 1. अद्वैत सम्प्रदाय (विशिष्टावाद)  -शंकराचार्य2. श्री सम्प्रदाय (विशिष्टाद्वैतवाद) -रामानुजाचार्य3. ब्रह्म सम्प्रदाय (द्वैत वाद) -मध्वाचार्य4. हंस सम्प्रदाय (सनकादि सम्प्रदाय,

पाश्चात्य काव्यशास्त्र के वाद

पाश्चात्य काव्यशास्त्र के वाद हिन्दी काव्यशास्त्र अरस्तू का विरेचन सिद्धांत  अरस्तू के द्वारा प्रयुक्त शब्द कैथार्सिस का अर्थ है सफाई करना या अशुद्धियों को दूर करना, अतः कैथार्सिस का व्युत्पत्तिपरक अर्थ हुआ शुद्धिकरण। अरस्तू ने

अंतः सलीला कामायनी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अंतः सलीला कामायनी वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. अंतः सलीला के रचनाकार हैं-1. अज्ञेय✅2. मुक्तिबोध3. पंत4. महादेवी वर्मा 2. अंतः सलीला का रचनाकाल है-1. 1957 ई.2. 1958 ई.3. 1959 ई.✅4. 1960 ई. 3. अंतः सलीला किस

प्रमुख नाटककार के नाटक

प्रमुख नाटककार के नाटक हिन्दी नाटक भीष्म साहनी के नाटक 1-हानूश (1977)2-कबिरा खड़ा बाजार में(1981)3-माधवी (1985)4-मुआवजे (1993)5-रंग दे बसंती चोला (1998)6-आलमगीर (1999) जगदीश चंद्र माथुर के नाटक 1-कोणार्क

हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रन्थ

हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रन्थ हिन्दी साहित्य का इतिहास 1.गार्सा-द-तासी-इस्त्वार द ला लितरेत्यूर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी 2.मौलवी करीमुद्दीनतबका तश्शुअहा में तजकिरान्ई जुअहा- ई हिंदी 3.शिवसिंह सेंगर शिवसिंह सरोज 4.सरजाँर्ज

प्रगतिवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रगतिवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1 प्रगतिवादी साहित्य में निहित है1 मार्क्सवादी दर्शन2 सामाजिक चेतना3 भावबोध4 सभी ★ 2 प्रगतिवाद के मार्क्सवाद समान रूसी व पश्चिमी दर्शन है1 साम्यवाद2 कम्युनिज्म3 दोनो ★4 दोनों

परिवर्तन सुमित्रानंदन पन्त सम्पूर्ण कविता व्याख्या

‘परिवर्तन’ यह कविता 1924 में लिखी गई थी। कविता रोला छंद में रचित है। यह एक लम्बी कविता है। यह कविता ‘पल्लव’ नामक काव्य संग्रह में संकलित है। परिवर्तन कविता को समालोचकों ने एक ‘ग्रैंड महाकाव्य’ कहा है। स्वयं पंत जी ने इसे पल्लव काल की

भक्ति काल के विविध तथ्य

भक्ति काल के विविध तथ्य हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल भक्ति काल को 'हिन्दी साहित्य का स्वर्ण काल' कहा जाता है।भक्ति काल के उदय के बारे में सबसे पहले जार्ज ग्रियर्सन ने मत व्यक्त किया। वे ही 'ईसायत की देन' मानते हैं।ताराचंद के अनुसार