घी गुड़ और शहद देनेवाला वृक्ष (निबंध) कक्षा 5 हिन्दी

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घी गुड़ और शहद देनेवाला वृक्ष आओ तुम्हारा परिचय घी गुड़ और शहद देनेवाले एक विचित्र वृक्ष से करवाएँ। उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों में एक ऐसा वृक्ष पाया जाता है जो घी गुड़ तथा शहद देता है। इसके अलावा यह वृक्ष फल औषधि जानवरों के लिए चारा ईंधन और कीड़ों व चूहों को मारने के … Read more

सोन के फर (कहानी) कक्षा 5 हिन्दी

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सोन के फर (कहानी) गजब दिन के बात आय। एक ठन गाँव रहिस। इहाँ के आदमी मन खेती-किसानी के बुता करें। जेकर खेत खार नइ रहँय, ओमन छेरी-पठरू अउ गाय गरुवा राखे रहँय। उही मन ल चरावय । दूध-दही, गोबर, छेना बेच के अपन गुजर-बसर करें । इही गाँव म सुखराम नाँव के मनखे रहिस। … Read more

मैं सड़क हूँ (आत्मकथा) कक्षा 5 हिन्दी

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मैं सड़क हूँ (आत्मकथा) जी हाँ! मैं सड़क हूँ। मिट्टी, पत्थर और डामर से बनी। एक बड़े अजगर की तरह मैदानों, जंगलों, पहाड़ों के बीच से गुजरती हुई। पेड़ों की छाया के नीचे से होकर मैदानों को पार करती हुई, गाँवों को शहरों से जोड़ती हूँ। मेरी उम्र कितनी है, यह मुझे भी याद नहीं। … Read more

सुनिता की पहिया कुर्सी(कहानी) कक्षा 5 हिन्दी

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सुनिता की पहिया कुर्सी (कहानी) सुनीता सुबह सात बजे सोकर उठी। कुछ देर तो वह अपने बिस्तर पर ही बैठी रही। वह सोच रही थी कि आज उसे क्या-क्या काम करने हैं। उसे याद आया कि आज तो बाजार जाना है सोचते ही उसकी आँखों में चमक आ गई। सुनीता आज पहली बार अकेले बाजार … Read more

काव्य हेतु

हिन्दी काव्यशास्त्र

काव्य हेतु काव्य हेतु से तात्पर्य काव्य की उत्पत्ति का कारण है।बाबू गुलाबराय के अनुसार ‘हेतु’का अभिप्राय उन साधनों सेे है, जो कवि की काव्य रचना में सहायक होते है। काव्य हेतु पर सर्वप्रथम् ‘अग्निपुराण ‘ में विचार किया गया है।काव्य हेतु पर विभिन्न आचार्यो के मत इस प्रकार है- आचार्य भामह का मत- इनके … Read more

वाक्यांश के लिए एक शब्द

हिंदी व्याकरण

वाक्यांश के लिए एक शब्द जिसे गिना न जा सके – अगणित जो कुछ भी नहीं जानता हो – अज्ञ जो बहुत थोड़ा जानता हो – अल्पज्ञ जिसका जन्म नहीं होता – अजन्मा पुस्तकों की समीक्षा करने वाला – समीक्षक , आलोचक जिसकी आशा न की गई हो – अप्रत्याशित जो इन्द्रियों से परे हो – अगोचर जो विधान के विपरीत हो … Read more

रस के अवयव :-

रस के अवयव :-                  रस के चार अवयव है- (1)स्थायी भाव :-                   प्रत्येक मनुष्य के हृदय में कुछ न कुछ भाव अवश्य रहते है तथा वे कारण पाकर जागृत होते है ।उदाहरण -प्रत्येक मनुष्य के चित्त में प्रेम, दुःख, … Read more

रस निष्पत्ति 

Ras-ke-ang

रस निष्पत्ति काव्य को पढ़कर या सुनकर और नाटक को देखकर सहृदय स्रोता पाठक या सामाजिक के चित्त में जो लोकोत्तर आनंद उत्पन्न होता है, वही रस है।     भरतमुनि को रस सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। भरतमुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र में जो रस सूत्र है वह इसप्रकार है-  ‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्ति’ भरतमुनि अर्थात विभाव, अनुभाव … Read more

हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास

Mahila Sahitykaar

हिन्दी की प्रथम महिला उपन्यासकार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ को माना जाता है। इन्होंने सन् 1890 ई. में ‘सुहासिनी’ नामक उपन्यास लिखा। ब्रजरत्नदास अनुसार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ का मूल नाम मल्लिका देवी था। हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास निम्नांकित हैं- उषा प्रियंवदा- (1) पचपन खम्भे लाल दीवारें (1961), (2) रुकोगी नहीं राधिका (1967), (3) … Read more

हिंदी डायरी साहित्य 

hindi sahitya notes

हिन्दी डायरी विद्या का प्रवर्तन श्री राम शर्मा कृत ‘सेवाग्राम की डायरी’ (1946) से माना जाता है। हिन्दी डायरी लेखक व डायरी निम्नलिखित हैं- लेखक डायरी घनश्यामदास बिड़ला डायरी के पन्ने धीरेंद्र वर्मा मेरी कालिज डायरी (1954) सुन्दरलाल त्रिपाठी दैनंदिनी सियारामशरण गुप्त दैनिकी उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ ज्यादा अपनी कम परायी (1959) हरिवंश राय बच्चन प्रवासी की … Read more

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