अनुच्छेद लेखन

किसी एक भाव या विचार को व्यक्त करने के लिए लिखे गये सम्बद्ध और लघु वाक्य-समूह को अनुच्छेद-लेखन कहते हैं।दूसरे शब्दों में- किसी घटना, दृश्य अथवा विषय को संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित ढंग से जिस लेखन-शैली में प्रस्तुत किया जाता है, उसे

हिन्दी व्याकरण: एकार्थक शब्द

हिन्दी व्याकरण: एकार्थक शब्द यहाँ कुछ प्रमुख एकार्थक शब्द दिया जा रहा है। ( अ ) अहंकार- मन का गर्व। झूठे अपनेपन का बोध।अनुग्रह- कृपा। किसी छोटे से प्रसत्र होकर उसका कुछ उपकार या भलाई करना।अनुकम्पा- बहुत कृपा। किसी के

तुलसीदास – कवितावली (उत्तरकाण्ड से ) कक्षा 12 हिंदी काव्य खंड

तुलसीदास - कवितावली (उत्तरकाण्ड से ) कक्षा 12 हिंदी काव्य खंड कवि परिचय जीवन परिचय- गोस्वामी तुलसीदास का जन्म बाँदा जिले के राजापुर गाँव में सन 1532 में हुआ था। कुछ लोग इनका जन्म-स्थान सोरों मानते हैं। इनका बचपन कष्ट में बीता।

संधि की परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण

संधि हिंदी व्याकरण में एक महत्वपूर्ण विषय है जो शब्दों के मेल को समझाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शब्दों की संरचना और उनके स्वरों के संगत समान्यता को बनाए रखना है। यहां संधि की परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण दिए जा रहे हैं: परिभाषा:

भाषा का स्वरूप और प्रकार

भाषा विश्व में मानव संवाद का महत्वपूर्ण साधन है। यह लोगों के बीच विचारों, भावनाओं, और ज्ञान का आदान-प्रदान करने का एक माध्यम है। भाषा का स्वरूप और प्रकार निम्नलिखित तरीके से हो सकते हैं: स्वरूप (Nature) - भाषा का स्वरूप उसकी संरचना और

भाषा के अर्थ में हिंदी शब्द का प्रयोग

हिंदी भाषा में शब्दों का प्रयोग अर्थ को स्पष्ट करने और संदेश को समझाने के लिए किया जाता है। यह भाषा भारत की एक मुख्य भाषा है और इसका प्रयोग देश के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है। हिंदी शब्दों का उपयोग व्यक्ति की भावनाओं,

भारतेन्दु हरिश्चंद्र का काव्य

इस पोस्ट का अध्ययन करने के बाद आप : भारतेंदु हरिश्चंद्र के काव्य से परिचित हो सकेंगे, उनके काव्य की विभिन्न विशेषताओं को जान सकेंगे, उनके काव्य में राष्ट्रीय जागरण की किस प्रकार अभिव्यक्ति हुई है, इसे रेखांकित कर सकेंगे।

मैथिलीशरण गुप्त का काव्य (राष्ट्रीय जागरण,नवजागरण और नारी चेतना के संदर्भ में)

इकाई 2 मैथिलीशरण गुप्त का काव्य (राष्ट्रीय जागरण,नवजागरण और नारी चेतना के संदर्भ में)इकाई की रूपरेखाउद्देश्यप्रस्तावनागुप्त जी के काव्य के मूल स्वर2.2.1 राष्ट्रीय नवजागरण2.2.2 किसान जीवन2.2,3 नारी भावनाहिन्दी काव्य-जगत में गुप्तजी का

रीतिकालीन शिल्पगत विशेषताएँ

रीतिकालीन शिल्पगत विशेषताएँ : (1) सतसई परम्परा का पुनरुद्धार(2) काव्य भाषा-वज्रभाषा(3) मुक्तक का प्रयोग(4) दोहा छंद की प्रधानता(5) दोहे के अलावा 'सवैया' (श्रृंगार रस के अनुकूल छंद) और 'कवित्त' (वीर रस के अनुकूल छंद) रीति कवियों के प्रिय

रीतिकालीन रचना एवं रचनाकार

रीतिकालीन रचना एवं रचनाकार चिंतामणि -कविकुल कल्पतरु, रस विलास, काव्य विवेक, श्रृंगार मंजरी, छंद विचार मतिराम -रसराज, ललित ललाम, अलंकार पंचाशिका, वृत्तकौमुदी राजा जसवंत सिंह -भाषा भूषण भिखारी दास -काव्य निर्णय, श्रृंगार निर्णय