हिन्दी साहित्य के एकांकीकार

हिन्दी साहित्य के एकांकीकार

हिन्दी साहित्य के प्रमुख एकांकीकार व उनके एकांकी के नाम इस प्रकार से हैं: –

राधाचरण गोस्वामी –तन-मन-धन गुसाँई जी के अर्पण

बालकृष्ण भट्ट -शिक्षादान

देवकीनंदन खत्री- जनेऊ का खेल

‘उग्र’ -चार बेचारे, अफजल बध, भाई मियाँ

सुदर्शन- आनरेरी मजिस्ट्रेट , राजपूत की हार, प्रताप प्रतिज्ञा

जयशंकर प्रसाद– एक घूँट

डॉ० रामकुमार वर्मा –रेशमी टाई, चारुमित्रा, विभूति, सप्तकिरण, औरंगजेब की आखिरी रात, पृथ्वी राज की आँखें, एक तोले अफीम की कीमत, दीपहीन, दस मिनट, चंगेज खाँ, कौमुदीमहोत्सव, मयूरपंख, जूही के फूल. 18 जुलाई की शाम, एक्ट्रेस

भुवनेश्वर –ताँबे के कीड़े, आजादी की नींद, सिकंदर, एक साम्यहीन साम्यवादी, प्रतिभा का विवाह, स्ट्राइक, बाजीराव की तस्वीर, फोटोग्राफर के सामने, लाटरी, श्यामा

उदयशंकर भट्ट –आत्मदान, दस हजार, एक ही कब्र में, विस्फोट, समस्या का अंत, निर्दोष की रक्षा, बीमार का इलाज

‘अश्क’ –लक्ष्मी का स्वागत, जोंक, अधिकार का रक्षक, अंधी गली, अंजो दीदी, सूखी डाली, स्वर्ग की झलक, भँवर, मोहब्बत, आपस का समझौता, छः एकांकी, साहब को जुकाम है, विवाह के दिन, देवताओं की छाया में

जगदीशचंद्र माथुर- भोर का तारा, रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला, मेरी बाँसुरी, ओ मेरे सपने, कबूतरखाना

सेठ गोविंददास –ईद और होली, फाँसी, प्रायश्चित, एकादमी

रामनरेश त्रिपाठी- स्वप्नों के चित्र, दिमागी ऐयाशी

भगवतीचरण वर्मा –सबसे बड़ा आदमी

विष्णु प्रभाकर -प्रकाश और परछाई, पापी इन्सान, दस बजे रात, गहरा सागर, क्या वह दोषी था, वापसी

लक्ष्मी नारायण मिश्र -स्वर्ग में विप्लव, कटोरी में कमल, मुक्ति का रहस्य राजयोग

जैनेंद्र- टकराहट

लक्ष्मीनारायण लाल –पर्वत के पीछे, बहुरंगी, ताजमहल के आँसू, औलादी का बेटा, दूसरा दरवाजा

धर्मवीर भारती- नदी प्यासी थी, नीली झील, संगमरमर पर एक रात, सृष्टि का आखिरी आदमी, आवाज का नीलाम

प्रभाकर माचवे -गली के मोड़ पर, गाँधी की राह पर, पागलखाने में पंचकन्या, वधू चाहिए

हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ -मातृमंदिर, राष्ट्रमंदिर, न्यायमंदिर, वाणीमंदिर

मोहन राकेश- अंडे के छिलके, प्यालियाँ टूटती हैं, सिपाही की माँ, छतरियाँ, बहुत बड़ा सवाल, हाँ ! करफ्यू

गिरिजाकुमार माथुर –उमरकैद

मार्कण्डेय-पत्थर और परछाई

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