संस्कृत के आचार्य

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भरतमुनि संस्कृत काव्यशास्त्री

भरतमुनि संस्कृत काव्यशास्त्री भरत मुनि की ख्याति नाट्यशास्त्र के प्रणेता के रूप में है, पर उनके जीवन और व्यक्तित्व के विषय में इतिहास अभी तक मौन है। इस संबंध में विद्वानों का एक मत यह भी है कि भरतमुनि वस्तुतः एक काल्पनिक मुनि का नाम है। इन कतिपय मतों को छोड़ दे तो भरत मुनि …

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भामह संस्कृत काव्यशास्त्री

भामह संस्कृत काव्यशास्त्री आचार्य बलदेव उपाध्याय ने भामह का समय 6 शती का पूर्वार्द्ध निश्चित किया है। भामह कश्मीर के निवासी थे तथा इनके पिता का नाम रक्रिल गोमी था। सर्वप्रथम भामह ने ही अलंकार को नाट्यशास्त्र की परतन्त्रता से मुक्त कर एक स्वतंत्र शास्त्र या संप्रदाय के रूप में प्रतिष्ठित किया। भामह के प्रसिद्ध …

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दण्डी संस्कृत काव्यशास्त्री

दण्डी संस्कृत काव्यशास्त्री आचार्य दण्डी का समय सप्तम शती स्वीकार किया गया है। यह दक्षिण भारत के निवासी थे। दण्डी पल्लव नरेश सिंह विष्णु के सभा पंडित थे। दंडी अलंकार संप्रदाय से सम्बद्ध है तथा इनके तीन ग्रंथ उपलब्ध होते हैं ‘काव्यदर्श’, ‘दशकुमारचरित’ और ‘अवन्तिसुन्दरी कथा’। प्रथम ग्रंथ काव्यशास्त्र-विषयक है, और शेष दो गद्य काव्य …

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वामन संस्कृत काव्यशास्त्री

वामन संस्कृत काव्यशास्त्री वामन कश्मीरी राजा जयापीड़ के सभा-पंडित थे। इनका समय 800 ई. के आसपास है। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ ‘काव्यालंकारसूत्रवृत्ति’ है।काव्यशास्त्रीय ग्रंथों में यह पहला सूत्र-बद्ध ग्रंथ है। सूत्रों की वृत्ति भी स्वयं वामन ने लिखी है। इस ग्रंथ में ५ अधिकरण है। प्रत्येक अधिकरणों में कुछ अध्याय है, और हर अध्याय में कुछ …

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उद्भट संस्कृत काव्यशास्त्री

उद्भट संस्कृत काव्यशास्त्री उद्भट कश्मीर राजा जयापीड़ के सभा-पण्डित थे। इनका समय नवम शती का पूर्वार्द्ध है। यह अलंकार वादी सिद्धांत से संबंध आचार्य हैं। इनकी तीन ग्रंथ प्रसिद्ध हैं- ‘काव्यालंकारसारसंग्रह’, ‘भामह-विवरण’ और ‘कुमारसम्भव’। इनमें से केवल प्रथम ग्रंथ उपलब्ध है जिसमे अलंकारो़ का आलोचनात्मक एवं वैज्ञानिक ढंग से विवेचन काया गया है। दण्डी के …

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रूद्रट संस्कृत काव्यशास्त्री

रूद्रट संस्कृत काव्यशास्त्री रुद्रट कश्मीर के निवासी थे तथा इनका जीवन-काल नवम शती का आरंभ माना जाता है। इनके ग्रंथ का नाम ‘काव्यालंकार’ है, जिसमें १६ अध्याय हैं और कुल ७३४ पद है। यद्यपि रुद्रट अलंकारवादी युग के आचार्य हैं, किंतु भारत के उपरांत रसका व्यवस्थित और स्वतंत्र निरूपण इनके ग्रन्थ में उपलब्ध है। नायक-नायिका-भेद …

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आनंदवर्धन संस्कृत काव्यशास्त्री

आनंदवर्धन संस्कृत काव्यशास्त्री आनंदवर्धन कश्मीर के राजा अवन्ति वर्मा के सभापंडित थे। इनका जीवन काल नवम शती का मध्य भाग है। आनंदवर्धन ने काव्यशास्त्र मे ‘ध्वनि सम्प्रदाय’ की स्थापना की। इनकी ख्याति ‘ध्वन्यालोक’ नामक अमर ग्रंथ के कारण है। इस ग्रंथ में चार उद्योग(अध्याय) है, तथा ११७ कारिकाएं(सूत्रों की व्याख्या)। काव्यशास्त्रीय आचार्यों में आनंदवर्धन एक …

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अभिनवगुप्त संस्कृत काव्यशास्त्री

अभिनवगुप्त संस्कृत काव्यशास्त्री अभिनवगुप्त कश्मीर के निवासी थे। यह दशम शती के अंत और एकादश शती के आरंभ में विद्यमान थे। इनका काव्यशास्त्र के साथ साथ दर्शनशास्त्र पर भी समान अधिकार था। यही कारण है कि काव्यशास्त्रीय विवेचन को आप अपना उच्च स्तर पर ले गए ध्वन्यालोक पर ‘लोचन’ और नाट्यशास्त्र पर ‘अभिनव-भारती’ नामक टीकाएं …

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कुन्तक संस्कृत काव्यशास्त्री

कुन्तक संस्कृत काव्यशास्त्री कुंतक कश्मीर के निवासी थे तथा इन्हें ‘वक्रोक्ति’ संप्रदाय के प्रवर्तक माना जाता है। कुंतक का समय दशम शती का अंत तथा एकादश शती का आरंभ माना जाता है। इनकी प्रसिद्धि ‘वक्रोक्तिजीवितम्’ नामक ग्रंथ के कारण है। इसमें 4 उन्मेष है। कुंतक प्रतिभासंपन्न आचार्य थे। इन्होंने वक्रोक्ति को काव्य का ‘जीवित’ माना। इन्होंने सर्वप्रथम …

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मम्मट संस्कृत काव्यशास्त्री

आचार्य मम्मट संस्कृत काव्यशास्त्र के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से एक समझे जाते हैं। वे अपने शास्त्रग्रंथ काव्यप्रकाश के कारण प्रसिद्ध हुए। कश्मीरी पंडितों की परंपरागत प्रसिद्धि के अनुसार वे नैषधीय चरित के रचयिता श्रीहर्ष के मामा थे। आचार्य मम्मट कश्मीर के एक पंडित परिवार में पैदा हुए थे। वे जैयट के पुत्र थे जिन्होंने ब्राह्मण …

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