छायावादोत्तर

छायावादोत्तर युग (1936 ई. के बाद)
‘राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा’ -सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, सोहन लाल द्विवेदी, श्याम नारायण पाण्डेय आदि । उत्तर-छायावादी काव्यधारा- निराला, पंत, महादेवी, जानकी वल्लभ शास्त्री आदि ।

प्रगतिवादी कवियों की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ

प्रगतिवादी कवियों की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ (क) केदारनाथ अग्रवाल (1) धूप चमकती है चाँदी की साड़ी पहने मैके में आयी बेटी की तरह मगन है। (2) एक बीते के बराबर, यह हरा ठिगना चना बांधे मुरैठा शीश पर छोटे गुलाबी फूल का। (3) मैंने उसको जब-जब देखा, लोहा जैसे तपते देख, गलते देखा, ढलते देख …

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प्रगतिवाद (1936 से 1942 ई० )

प्रगतिवाद (1936 से 1942 ई० ) लखनऊ में अप्रैल, 1936 ई० में ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना और प्रथम अधिवेशन के समय से हिन्दी में प्रगतिवादी आन्दोलन की शुरुआत होती है। इस अधिवेशन के प्रथम अध्यक्ष मुंशी प्रेमचंद थे। सन् 1934 ई० में गोर्की के नेतृत्व में रूस में ‘सोवियत लेखक संघ’ की स्थापना हुई। …

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हिंदी साहित्य में नयी कविता का युग

‘दूसरे सप्तक’ के प्रकाशन वर्ष 1951ई० से ‘नयी कविता’ का प्रारंभ माना जाता  है। ‘नयी कविता’ उन कविताओं को कहा जाता है, जिनमें परम्परागत कविता से आगे नये भाव बोधों की अभिव्यक्ति के साथ ही नये मूल्यों और शिल्प विधान का अन्वेषण किया गया। अज्ञेय को ‘नयी कविता का भारतेन्दु’ कह सकते हैं । नयी …

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हिन्दी पद्य साहित्य

साठोत्तरी कविता आंदोलन

साठोत्तरी हिन्दी साहित्य के इतिहास के अन्तर्गत सन् 1960 ई० के बाद मुख्यतः नवलेखन (नयी कविता, नयी कहानी आदि) युग से काफी हद तक भिन्नता की प्रतीति कराने वाली ऐसी पीढ़ी के द्वारा रचित साहित्य है जिनमें विद्रोह एवं अराजकता का स्वर प्रधान था। साठोत्तरी लेखन में विद्रोही चेतनायुक्त आन्दोलन प्राथमिक रूप से कविता के …

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hindi sahitya notes

प्रयोगवादी कवियों की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ

प्रयोगवादी कवियों की महत्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ (क) अज्ञेय (1) वही परिचित दो आँखें ही चिर माध्यम हैं सब आँखों से सब दर्दों से मेरे लिए परिचय का। (2) यह दीप अकेला स्नेह भरा, है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति दे दो। (3) किन्तु हम हैं द्वीप । हम धारा नहीं हैं स्थिर समर्पण …

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हिंदी साहित्य का प्रयोगवाद

‘प्रयोगवाद’  ‘तार सप्तक’ के माध्यम से वर्ष 1943 ई० में प्रकाशन जगत में आई और जो प्रगतिशील कविताओं के साथ विकसित होती गयी तथा जिनका पर्यावसान ‘नयी कविता’ में हो गया। कविताओं को सबसे पहले नंद दुलारे बाजपेयी ने ‘प्रयोगवादी कविता’ कहा। अज्ञेय, गिरिजा कुमार माथुर, मुक्तिबोध, नेमिचंद जैन, भारत भूषण अग्रवाल, रघुवीर सहाय, धर्मवीर …

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हिन्दी पद्य साहित्य

हिंदी साहित्य में नवगीत

हिंदी साहित्य में नवगीत, हिन्दी काव्य-धारा की एक नवीन विधा है। इसकी प्रेरणा सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई और लोकगीतों की समृद्ध भारतीय परम्परा से है। हिंदी साहित्य के प्रमुख नवगीतकार में सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, ठाकुर प्रसाद सिंह, शान्ति सुमन, माहेश्वर तिवारी, सुभाष वशिष्ठ और कुमार रवीन्द्र नाम प्रमुख हैं . “नवगीत” एक यौगिक …

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हिन्दी पद्य साहित्य

हिन्दी साहित्य में ग़ज़ल

हिन्दी साहित्य में ग़ज़ल को सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह हिन्दी साहित्य की एक सशक्त और अत्यन्त लोकप्रिय काव्य – विधा है। ग़ज़ल की शुरुआत ग़ज़ल की शुरुआत लगभग पन्द्रह सौ वर्ष पहले अरबी भाषा में हुई थी। अरबी में मुख्य रूप से कसीदे ( राजाओं की प्रशंसा में लिखे जाने वाले काव्य ) और …

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हिन्दी पद्य साहित्य

दलित कविता का विकास

दलित कविता का विकास संत रैदास को हिंदी का प्रथम दलित कवि माना जाता है। आधुनिक युग के दलित कवियों में प्रथम नाम हीरा डोम और स्वामी अच्युतानंद का नाम लिया जाता है। दलित विद्वानों ने सन 1914 ईस्वी में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हीरा डोम की कविता अछूत की शिकायत को हिंदी की प्रथम …

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नई कविता के कवि

नई कविता के कवि 1911-1987 ई॰        अज्ञेय 1911-1993 ई॰        शमशेर बहादुर सिंह 1914-1985 ई॰        भवानी प्रसाद मिश्र 1917-1964 ई॰        गजानन माधव मुक्तिबोध 1917-1991 ई॰        प्रभाकर माचवे 1919-1975 ई॰        भारत भूषण अग्रवाल 1919-1994 ई॰        गिरिजा कुमार माथुर 1922-2000 ई॰        नरेश मेहता 1922-2002 ई॰        लक्ष्मीकान्त वर्मा 1922-1992 …

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