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छायावादोत्तर

छायावादोत्तर युग (1936 ई. के बाद)
‘राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा’ -सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, सोहन लाल द्विवेदी, श्याम नारायण पाण्डेय आदि । उत्तर-छायावादी काव्यधारा- निराला, पंत, महादेवी, जानकी वल्लभ शास्त्री आदि ।

अंतः सलीला कामायनी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अंतः सलीला कामायनी वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. अंतः सलीला के रचनाकार हैं-1. अज्ञेय✅2. मुक्तिबोध3. पंत4. महादेवी वर्मा 2. अंतः सलीला का रचनाकाल है-1. 1957 ई.2. 1958 ई.3. 1959 ई.✅4. 1960 ई. 3. अंतः सलीला किस रेलयात्रा के दौरान लिखी गई-1. दिल्ली से इलाहाबाद2. आगरा से इलाहाबाद3. आगरा से दिल्ली4. इलाहाबाद से दिल्ली✅5.
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राष्ट्रीय सांस्कृतिक धारा के कवि 

राष्ट्रीय सांस्कृतिक धारा के कवि  1887-1960 ई.    बालकृष्ण शर्मा नवीन1889-1968 ई.    माखनलाल चतुर्वेदी1898-1961 ई.    उदयशकर भट्ट1903-1981 ई.    भगवती चरण वर्मा1905-1948 ई.    सुभद्रा कुमारी चौहान1906-1988 ई.    सोहनलाल द्विवेदी1907-1984 ई.    केदारनाथ मिश्र प्रभात1907-1991 ई.    श्याम नारायण पांडेय1907-1986 ई.    जगन्नाथ प्रसाद
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छायावाद प्रगतिवाद प्रयोगवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

छायावाद प्रगतिवाद प्रयोगवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न स्कन्दगुप्त, आधे-अधूरे, अंधायुग व आधुनिक हिंदी के प्रमुख वाद-छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न 1 "अपने कुकर्मों का फल चखने में कड़वा, पर परिणाम में मधुर होता है।" उक्त कथन किसका है–-1 रामा2 भटार्क✔3 विजया4 स्कन्दगुप्तप्रश्न 2 देवसेना को निम्न
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अज्ञेय पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अज्ञेय पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न 1.अज्ञेय की प्रथम काव्य संग्रह का नाम है-- 1. बावरा अहेरी 2.इत्यलम 3.भग्नदूत ✅ 4 . चिंता प्रश्न 2 . 'यह दीप अकेला' किस वाद से संबंधित है? 1 प्रगतिवाद 2 प्रयोगवाद ✅ 3 छायावाद 4 यथार्थवाद प्रश्न 3 "कभी बासन अधिक घिसने से मुल्लमा छूट जाता है। " किस कविता की पंक्ति है? 1 नदी के
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छायावादोत्तर युग (1936 ई० के बाद)

छायावादोत्तर युग (1936 ई० के बाद) छायावादोत्तर युग में हिन्दी काव्यधारा बहुमुखी हो जाती है- (A) पुरानी काव्यधारा राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', सोहन लाल द्विवेदी, श्याम नारायण पाण्डेय आदि। उत्तर-छायावादी काव्यधारा- निराला, पंत, महादेवी, जानकी वल्लभ शास्त्री आदि।
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छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर

छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर (i) छायावाद में कविता करने का उद्देश्य 'स्वान्तः सुखाय' है जबकि प्रगतिवाद में 'बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' है। (ii) छायावाद में वैयक्तिक भावना प्रबल है जबकि प्रगतिवाद में सामाजिक भावना। (iii) छायावाद में अतिशय कल्पनाशीलता है जबकि प्रगतिवाद में ठोस यथार्थ।
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छायावादोत्तर युगीन प्रसिद्ध पंक्तियाँ

छायावादोत्तर युगीन प्रसिद्ध पंक्तियाँ (विविध) HINDI SAHITYA श्वानो को मिलता दूध वस्त्रभूखे बालक अकुलाते हैं -दिनकर लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,सिंहसान खाली करो कि जनता आती है। -दिनकर कवि कुछ ऐसी तान सुनाओं, जिससे उथल-पुथल मच जाएएक हिलोर इधर से आये, एक हिलोर
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सच्चिदानंद वात्यायन अज्ञेय प्रश्नमाला

सच्चिदानंद वात्यायन अज्ञेय प्रश्नमाला हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न Q1 हरी घास पर छड़ भर कविता किसकी रचना हैA अज्ञेय✔B पंतC निरालाD प्रसाद Q2हरी घास पर छड़ भर कविता की भाषा हैA तत्सम बहुलB तद्भव✔C विदेशीD अंग्रेजी Q3और रहे बैठे तोलोग कहेंगेधुंधले में ---------बैठे हैंA दुबके प्रेमी✔B छुपके प्रेमीC दो प्रेमीD कोई Q4 हरि घास किसका प्रतीक है
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