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छायावादोत्तर

छायावादोत्तर युग (1936 ई. के बाद)
‘राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा’ -सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, सोहन लाल द्विवेदी, श्याम नारायण पाण्डेय आदि । उत्तर-छायावादी काव्यधारा- निराला, पंत, महादेवी, जानकी वल्लभ शास्त्री आदि ।

नयी कविता प्रसिद्ध पंक्तियाँ

नयी कविता प्रसिद्ध पंक्तियाँ HINDI SAHITYA हम तो 'सारा-का सारा' लेंगे जीवन'कम-से-कम' वाली बात न हमसे कहिए। -रघुवीर सहाय मौन भी अभिव्यंजना हैजितना तुम्हारा सच है, उतना ही कहोतुम व्याप नहीं सकतेतुममें जो व्यापा है उसे ही निबाहो।-अज्ञेय जी हाँ, हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ।मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँमैं किसिम -किसिम केगीत बेचता हूँ।
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तारसप्तक के कवि

तारसप्तक के कवि HINDI SAHITYA तार सप्तक' (1943 ई०) अज्ञेय, मुक्तिबोध, गिरिजाकुमार माथुर, प्रभाकर माचवे, भारत भूषण अग्रवाल, नेमिचंद्र जैन, रामविलास शर्मा दूसरा सप्तक (1951 ई०) रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, नरेश मेहता, शमशेर बहादुर सिंह, भवानी प्रसाद मिश्र, शकुंतला माथुर, हरिनारायण व्यास तीसरा सप्तक (1959 ई०) कीर्ति चौधरी,
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नौका विहार एवं परिवर्तन का वस्तुनिष्ठ प्रश्न

नौका विहार एवं परिवर्तन का वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न 1 "माँ के उर पर शिशु सा समीप।" उक्त पंक्ति में कवि का 'शिशु' से तात्पर्य है-- 1 नदी 2 कोक 3 द्वीप✔ 4 सर्प प्रश्न 2 नाव के पार लगते ही कवि कैसे हो जाते हैं--- 1 बेहोश 2 भावुक 3 दार्शनिक✔ 4 आक्रोशित प्रश्न 3 नौका विहार की तुलना किससे की
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प्रयोगवाद की विशेषताएं

प्रयोगवाद की विशेषताएं 'प्रयोगवाद' नाम उन कविताओं के लिए है जो कुछ नये बोधों, संवेदनाओं तथा उन्हें प्रेषित करनेवाले शिल्पगत चमत्कारों को लेकर शुरू-शुरू में 'तार सप्तक' के माध्यम से वर्ष 1943 ई० में प्रकाशन जगत में आई .बाद में प्रगतिशील कविताओं का पर्यावसान 'नयी कविता' में हो गया।सबसे पहले नंद दुलारे बाजपेयी ने 'प्रयोगवादी कविता' कहा।प्रगतिवाद
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रघुवीर सहाय -अपने समय के आर-पार देखता कवि

रघुवीर सहाय -अपने समय के आर-पार देखता कवि Table of Contentsरघुवीर सहाय की कविता : विचारवस्तु के विविध आयामरघुवीर सहाय की कविता :समय की अवधारणारघुवीर सहाय की कविता का वैचारिक आयाम रघुवीर सहाय की रचनात्मक लक्ष्य : जन पक्षधरतारघुवीर सहाय की कविता में नारी के प्रति दृष्टिकोणरघुवीर सहाय की कविता की वैचारिक सीमाएँरघुवीर सहाय की काव्यभाषा का
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हरी घास पर छड़ भर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हरी घास पर छड़ भर सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का कविता संग्रह है. यहाँ पर इसकी कविता और सम्बंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रस्तुत है। हरी घास पर छड़ भर आओ बैठेंइसी ढाल की हरी घास पर। माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है,और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरहसदा बिछी है-हरी, न्यौती, कोई आ कर रौंदे। आओ, बैठोतनिक और सट कर, कि
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अंतः सलीला कामायनी पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

अंतः सलीला कामायनी पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. अंतः सलीला के रचनाकार हैं-1. अज्ञेय✔2. मुक्तिबोध3. पंत4. महादेवी वर्मा2. अंतः सलीला का रचनाकाल है-1. 1957 ई.2. 1958 ई.3. 1959 ई.✔4. 1960 ई.3. अंतः सलीला किस रेलयात्रा के दौरान लिखी गई-1. दिल्ली से इलाहाबाद2. आगरा से इलाहाबाद3. आगरा से दिल्ली4. इलाहाबाद से दिल्ली✔5. इलाहाबाद से आगरा4. जिस तरह रेत को
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मुक्तिबोध : अंधेरे में ब्रम्हराक्षस भूल-गलती वस्तुनिष्ठ प्रश्न

मुक्तिबोध : अंधेरे में ब्रम्हराक्षस भूल-गलती 01."मुक्तिबोध का जन्म किस वर्ष हुआ था?1. 13 नवम्बर 1917✔2. 14 नवम्बर 19183. 15 नवम्बर 19194. 16 नवंबर 191602."मुक्तिबोध की मृत्यु तिथि निम्नलिखित में से क्या होगी?1. 17 सितम्बर 19642. 18 सितम्बर। 19643. 19 सितंबर। 19654. 20 सितम्बर। 1965उत्तर:- 11 सितम्बर 196403."निम्नलिखित में से मुक्तिबोध
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राम की शक्ति पूजा वस्तुनिष्ठ प्रश्न

राम की शक्ति पूजा वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1 *राम की शक्ति पूजा* का रचना काल है - ?1, 19352, 1936✔️3, 19374, 1938 2 राम की शक्ति पूजा प्रथमतः किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी?1 भारत✔️2 मतवाला3 दिनमान4 सुधावर्षण 3 राम की शक्ति पूजा में सर्वाधिक प्रभाव है -1 वाल्मीकि रामायण2 रामचरित मानस3 कृतिवास रामायण✔️4 शिव महिमा स्त्रोत 4 *राघव - लाघव* का
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