हरी घास पर छड़ भर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

हरी घास पर छड़ भर सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का कविता संग्रह है. यहाँ पर इसकी कविता और सम्बंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रस्तुत है।

हरी घास पर छड़ भर

आओ बैठें
इसी ढाल की हरी घास पर।

माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है,
और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरह
सदा बिछी है-हरी, न्यौती, कोई आ कर रौंदे।

आओ, बैठो
तनिक और सट कर, कि हमारे बीच स्नेह-भर का व्यवधान रहे, बस,
नहीं दरारें सभ्य शिष्ट जीवन की।

चाहे बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो, स्वगत गुनगुनाओ,
चाहे चुप रह जाओ-
हो प्रकृतस्थ : तनो मत कटी-छँटी उस बाड़ सरीखी,
नमो, खुल खिलो, सहज मिलो
अन्त:स्मित, अन्त:संयत हरी घास-सी।

क्षण-भर भुला सकें हम
नगरी की बेचैन बुदकती गड्ड-मड्ड अकुलाहट-
और न मानें उसे पलायन;
क्षण-भर देख सकें आकाश, धरा, दूर्वा, मेघाली,
पौधे, लता दोलती, फूल, झरे पत्ते, तितली-भुनगे,
फुनगी पर पूँछ उठा कर इतराती छोटी-सी चिड़िया-
और न सहसा चोर कह उठे मन में-
प्रकृतिवाद है स्खलन
क्योंकि युग जनवादी है।

क्षण-भर हम न रहें रह कर भी :
सुनें गूँज भीतर के सूने सन्नाटे में किसी दूर सागर की लोल लहर की
जिस की छाती की हम दोनों छोटी-सी सिहरन हैं-
जैसे सीपी सदा सुना करती है।

क्षण-भर लय हों-मैं भी, तुम भी,
और न सिमटें सोच कि हम ने
अपने से भी बड़ा किसी भी अपर को क्यों माना!

क्षण-भर अनायास हम याद करें :
तिरती नाव नदी में,
धूल-भरे पथ पर असाढ़ की भभक, झील में साथ तैरना,
हँसी अकारण खड़े महा वट की छाया में,
वदन घाम से लाल, स्वेद से जमी अलक-लट,
चीड़ों का वन, साथ-साथ दुलकी चलते दो घोड़े,
गीली हवा नदी की, फूले नथुने, भर्रायी सीटी स्टीमर की,
खँडहर, ग्रथित अँगुलियाँ, बाँसे का मधु,
डाकिये के पैरों की चाप,
अधजानी बबूल की धूल मिली-सी गन्ध,
झरा रेशम शिरीष का, कविता के पद,
मसजिद के गुम्बद के पीछे सूर्य डूबता धीरे-धीरे,
झरने के चमकीले पत्थर, मोर-मोरनी, घुँघरू,
सन्थाली झूमुर का लम्बा कसक-भरा आलाप,
रेल का आह की तरह धीरे-धीरे खिंचना, लहरें
आँधी-पानी,
नदी किनारे की रेती पर बित्ते-भर की छाँह झाड़ की
अंगुल-अंगुल नाप-नाप कर तोड़े तिनकों का समूह,
लू,
मौन।

याद कर सकें अनायास : और न मानें
हम अतीत के शरणार्थी हैं;
स्मरण हमारा-जीवन के अनुभव का प्रत्यवलोकन-
हमें न हीन बनावे प्रत्यभिमुख होने के पाप-बोध से।
आओ बैठो : क्षण-भर :
यह क्षण हमें मिला है नहीं नगर-सेठों की फैया जी से।
हमें मिला है यह अपने जीवन की निधि से ब्याज सरीखा।

आओ बैठो : क्षण-भर तुम्हें निहारूँ
अपनी जानी एक-एक रेखा पहचानूँ
चेहरे की, आँखों की-अन्तर्मन की
और-हमारी साझे की अनगिन स्मृतियों की :
तुम्हें निहारूँ,
झिझक न हो कि निरखना दबी वासना की विकृति है!

धीरे-धीरे
धुँधले में चेहरे की रेखाएँ मिट जाएँ-
केवल नेत्र जगें : उतनी ही धीरे
हरी घास की पत्ती-पत्ती भी मिट जावे लिपट झाड़ियों के पैरों में
और झाड़ियाँ भी घुल जावें क्षिति-रेखा के मसृण ध्वान्त में;
केवल बना रहे विस्तार-हमारा बोध
मुक्ति का,
सीमाहीन खुलेपन का ही।

चलो, उठें अब,
अब तक हम थे बन्धु सैर को आये-
(देखे हैं क्या कभी घास पर लोट-पोट होते सतभैये शोर मचाते?)
और रहे बैठे तो लोग कहेंगे
धुँधले में दुबके प्रेमी बैठे हैं।

-वह हम हों भी तो यह हरी घास ही जाने :
(जिस के खुले निमन्त्रण के बल जग ने सदा उसे रौंदा है
और वह नहीं बोली),
नहीं सुनें हम वह नगरी के नागरिकों से
जिन की भाषा में अतिशय चिकनाई है साबुन की
किन्तु नहीं है करुणा।

उठो, चलें, प्रिय!

हरी घास पर छड़ भर कविता का वस्तुनिष्ठ प्रश्न


Q1 हरी घास पर छड़ भर कविता किसकी रचना है
A अज्ञेय✔
B पंत
C निराला
D प्रसाद

Q2हरी घास पर छड़ भर कविता की भाषा है
A तत्सम बहुल
B तद्भव✔
C विदेशी
D अंग्रेजी

Q3और रहे बैठे तो
लोग कहेंगे
धुंधले में ———बैठे हैं
A दुबके प्रेमी✔
B छुपके प्रेमी
C दो प्रेमी
D कोई

Q4 हरि घास किसका प्रतीक है

A सहजता
B मुक्ति
C मानव मन की दबी इक्छा
D सभी✔

Q5 हरी घास पर छड़ भर कविता मे कवि ने किसका मूल्य आंका हैं
A घास का
B छड़ का✔
C शहरी जीवन का
D समाज का

Q6 नमो,खुल खिलो,
सहज मिलो
अन्तः स्मित, अन्तः —–घास सी
A स्फीत
B स्फीत घास
C संयत घास✔
D मुखरित घास

Q7 कविता का स्वरूप हैं
A समस्यात्मक
B चिंतनशील✔
C प्रेरणात्मक
D विश्लेषणत्मक

Q8 कवि हरि घास पर किसे आने का आमंत्रण दे रहा हैं
A दोस्त को
B प्रेमिका को
C शहरी जीवन से उबे डूबे लोगो को✔
D कोई नहीं

Q9कविता में शहरी मन की भाषा की कित्रिमता की उपमा दी गई हैं
A गाड़ी की इंजन✔
B साबुन की चिकनाई से
C हेडलाइट से
D सभी से

Q10 कविता में कैसे बिम्बो का प्रयोग हुआ है
A दृश्य
B ध्वनि
C दोनो✔
D कोई नही

Q11 कलगी बाजरे की कैसी रचना है
A छायावादी
B प्रगतिवादी
C प्रयोगवादी✔
D नई कविता
Q12 कवि अपने प्रेमिका की उपमा किससे दी है
A कुमुदिनी
B तारा
C जूही
D कोई नही✔

Q13 ललाती सांझ से क्या आशय है
A ललकारती शाम
B लजाती शाम
C लालिमायुक्त✔
D सभी

Q14 अज्ञेय का जीवनकाल हैं
A1918से 1987
B 1911 से 1987✔
C1911 से 1977
D 1919 से 1978

Q15 सृष्टि के विस्तार का
ऐश्वर्य का
————-?
A अनुराग का
B औदार्य का✔
C साहचर्य का
Dd पारावार का

Q16 कवि अपनी प्रेमिका की तुलना करता हैं
A कलगी बाजरे की से
B हरि बिछली घास से
C दोनों✔
D कोई नही

Q17 मालंच शब्द का अर्थ है
A दुपट्टा
B तोता
C फूलो का बगीचा✔
D सभी

Q18 कलगी बाजरे की कविता में है
A परम्परा गत उपमानों से विद्रोह
B नए उपमान का प्रयोग
C दोनो✔
D कोई नही

Q19 कवि पुराने उपमानों को कवि कहता है
A बासी
B जूठे
C मैले✔
D सभी
Q20 शब्द——–हैं
मगर क्या समर्पण कुछ नही हैं
A जादू✔
B बेकाबू
C सहारा
D अर्पण

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