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भक्तिकाल

भक्ति काल अपना एक अहम और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को पूर्व मध्यकाल भी कहा जाता है। जिसकी समयावधि संवत् 1343ई से संवत् 1643ई तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य(साहित्यिक दो प्रकार के हैं- धार्मिक साहित्य और लौकिक साहित्य) का श्रेष्ठ युग है। जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्यामसुन्दर दास ने स्वर्णयुग, आचार्य राम चंद्र शुक्ल ने भक्ति काल एवं हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लोक जागरण कहा। सम्पूर्ण साहित्य के श्रेष्ठ कवि और उत्तम रचनाएं इसी में प्राप्त होती हैं।

भ्रमरगीत सार वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भ्रमरगीत सार वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1)श्री कृष्ण किसे संदेशवाहक बनाकर भेजते है??उद्धव🎯अक्रूर जीबलरामकिसी को नही2)उपांगसुत किन्हें कहा जाता है??उद्धव🎯अक्रूरबलरामकृष्ण 🎯🎯🎯🎯🎯🎯3)वृषभानुतनया किन्हे कहा गया है--यशोदारुक्मणीराधा🎯सुशीला 🎯🎯🎯🎯🎯🎯4)किनके रूप,रंग,शरीर, मे समानता बताई गयी है---उद्धवकृष्ण1+2 दोनो🎯बलरामसभी
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कबीरदास जी सम्पूर्ण परिचय

कबीरदास का जन्म कैसे हुआ ? कबीर की उत्पत्ति के संबंध में अनेक प्रकार के प्रवाद प्रचलित हैं। कहते हैं, काशी में स्वामी रामानंद का एक भक्त ब्राह्मण था, जिसकी किसी विधवा कन्या को स्वामीजी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद भूल से दे दिया। फल यह हुआ कि उसे एक बालक उत्पन्न हुआ, जिसे वह लहरतारा के ताल के पास फेंक आई। अली या नीरू नाम का जुलाहा उस बालक को
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संत काव्य की सामान्य विशेषताएँ

हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल को निर्गुण और सगुण भक्ति काव्यधारा इन दो भागों में विभाजित किया जाता है । इस काल में निर्गुण भक्ति पद्धति अत्याधिक प्रभावी रही हैं। निर्गुण भक्तिधारा में दो शाखाएँ विकसित हुई एक ज्ञानाश्रयी शाखा और दुसरी प्रेममार्गी शाखा। ज्ञानाश्रयी शाखा को संत काव्य नाम से संबोधित किया जाता हैं। इसके प्रवर्तक संत कबीर माने जाते हैं।संत
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कबीर : कबीर ग्रंथावली (आरंभिक 100 पद) सं. श्याम सुन्दर दास

कबीर : कबीर ग्रंथावली (आरंभिक 100 पद) सं. श्याम सुन्दर दास Table of Contentsकबीर : कबीर ग्रंथावली (आरंभिक 100 पद) सं. श्याम सुन्दर दासगुरुदेव को अंगकबीर की साखियां //गुरुदेव को अंग // साखी से कबीर की साखियां //गुरुदेव को अंग // साखी से कबीर की साखियां //गुरुदेव को अंग // साखी से कबीर की साखी: गुरुदेव कौ अंग वस्तुनिष्ठ प्रश्न सुमिरन को
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कृष्णभक्ति शाखा के कवि

कृष्णभक्ति शाखा के कवि सूरदास, नंददास, कृष्णदास, परमानंद, कुंभनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी, गोविन्दस्वामी, हितहरिवंश, गदाधर भट्ट, मीराबाई, स्वामी हरिदास, सूरदास-मदनमोहन, श्रीभट्ट, व्यास जी, रसखान, ध्रुवदास, चैतन्य महाप्रभु । रचनाएँ 1. सूरसागर   2. सूरसारावली   3. साहित्य लहरी
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सगुण भक्ति उद्भव एवं विकास

हिन्दी साहित्य के इतिहास में भक्ति काल महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को 'पूर्व मध्यकाल' भी कहा जाता है। इसकी समयावधि 1375 वि.सं से 1700 वि.सं तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग है जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्यामसुन्दर दास ने स्वर्णयुग, आचार्य राम चंद्र शुक्ल ने भक्ति काल एवं हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
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निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा)

ज्ञानाश्रयी शाखा के भक्त-कवि 'निर्गुणवादी' थे, और नाम की उपासना करते थे। गुरु का वे बहुत सम्मान करते थे, और जाति-पाति के भेदों को नहीं मानते थे। वैयक्तिक साधना को वह प्रमुखता देते थे। मिथ्या आडंबरों और रूढियों का विरोध करते थे। साधारण जनता पर इन संतों की वाणी का ज़बरदस्त प्रभाव पड़ा। इन संतों में प्रमुख कबीरदास थे। अन्य मुख्य संत कवि नानक,
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भ्रमरगीतसार पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भ्रमरगीत सार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा सम्पादित महाकवि सूरदास के पदों का संग्रह है। उन्होने सूरसागर के भ्रमरगीत से लगभग 400 पदों को छांटकर उनको 'भ्रमरगीत सार' के रूप में प्रकाशित कराया था। भ्रमरगीतसार पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न 1) सूरसागर के किस पद में रामकथा से संबंधित पद हैं-1)प्रथम एवम नवम✔2)तृतीय एवम दशम3)प्रथम एवम दशम4)इनमें से
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कबीरदास पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

कबीरदास पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1)भक्तिकाल का उदय "इस्लामी आक्रमण की प्रतिक्रिया स्वरूप"मानने वाले विद्वान है???ग्रिर्यसनशुक्ल✔हजारी प्रसादमुक्तिबोध🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫2)आचार्य शुक्लानुसार संत काव्य धारा का प्रथम कवि है???कबीरदास✔नामदेवगुरुनानकदेवरैदास🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯3)हिन्दी मे भक्ति साहित्य की परंपरा का प्रर्वतन किसे किया---रैदासकबीरदास✔नामदेवदादूदयाल🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯4)असंगत
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