भक्तिकाल

भक्ति काल अपना एक अहम और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को पूर्व मध्यकाल भी कहा जाता है। जिसकी समयावधि संवत् 1343ई से संवत् 1643ई तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य(साहित्यिक दो प्रकार के हैं- धार्मिक साहित्य और लौकिक साहित्य) का श्रेष्ठ युग है। जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्यामसुन्दर दास ने स्वर्णयुग, आचार्य राम चंद्र शुक्ल ने भक्ति काल एवं हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लोक जागरण कहा। सम्पूर्ण साहित्य के श्रेष्ठ कवि और उत्तम रचनाएं इसी में प्राप्त होती हैं।

हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

विविध भक्ति सम्प्रदाय

विविध भक्ति सम्प्रदाय 1. अद्वैत सम्प्रदाय (विशिष्टावाद)  -शंकराचार्य2. श्री सम्प्रदाय (विशिष्टाद्वैतवाद) -रामानुजाचार्य3. ब्रह्म सम्प्रदाय (द्वैत वाद) -मध्वाचार्य4. हंस सम्प्रदाय (सनकादि सम्प्रदाय, दवैतादवैतवाद) -निम्बकाचार्य5. वल्लभ सम्प्रदाय (शुद्धाद्वैतवाद) -वल्लभाचार्य6. रुद्र सम्प्रदाय (शुद्ध ब्रह्म मायारहित) -विष्णु स्वामी7. गौड़ीय सम्प्रदाय (भेदाभेदवाद) -चैतन्य महाप्रभु8. सखीसम्प्रदाय (हरिदासी सम्प्रदाय)  -हरिदास 9. रसिक. सम्प्रदाय – अग्रदास10. स्वसुखी सम्प्रदाय -रामचरण दास11. उद्धति  सम्प्रदाय -सहजानंद12.  महापुरुषिया सम्प्रदाय-शांकरदेव13. रामदासी सम्प्रदाय – रामदास14. . तत्सुखी सम्प्रदाय-जीवाराम.15.  राधावल्लभ सम्प्रदाय -गोस्वामी हित हरिवंश16. वारकरी सम्प्रदाय- पुंडलिक 

हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रगतिवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रगतिवाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1 प्रगतिवादी साहित्य में निहित है1 मार्क्सवादी दर्शन2 सामाजिक चेतना3 भावबोध4 सभी ★ 2 प्रगतिवाद के मार्क्सवाद समान रूसी व पश्चिमी दर्शन है1 साम्यवाद2 कम्युनिज्म3 दोनो ★4 दोनों नहीं 3 विश्व का पहला लेखक संगठन है जिसके समान प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई1 वर्ल्ड राइटर एसोसिएसन2 सोवियत लेखक संघ ★3 …

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हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल

भक्ति काल के विविध तथ्य

भक्ति काल के विविध तथ्य भक्ति काल को ‘हिन्दी साहित्य का स्वर्ण काल’ कहा जाता है। भक्ति काल के उदय के बारे में सबसे पहले जार्ज ग्रियर्सन ने मत व्यक्त किया। वे ही ‘ईसायत की देन’ मानते हैं। ताराचंद के अनुसार भक्ति काल का उदय ‘अरबों की देन’ है। रामचन्द्र शुक्ल के मतानुसार, ‘देश में …

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हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

विनय पत्रिका पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

विनय पत्रिका पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1,, असंभव को संभव और संभव को असंभव करने वाली कौन है? 1, शिव 2, हनुमान ✅3, राम 4,इनमें से कोई नहीं 2, हनुमान को क्या नहीं कहा गया है ।1,बंदी छोर 2, जन रंजन 3, अरि गन गंजन4, हरिचरण रज✅ 3,, सामगाता ग्रहणी किसे कहा गया है 1, हनुमान …

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हिंदी के संत कवि

संत काव्य के प्रमुख कवि : संत काव्य के प्रवर्तक संत कबीर माने जाते हैं। इस विचारधारा के बीज आदिकाल के नाथ कवियों तथा संत नामदेव की रचनाओं में मिलते हैं। भक्ति कालीन निर्गुण संत कवियों में कबीर, दाद, नानक, रैदास, सुन्दरदास, मलूकदास आदि संतो ने इस धारा के प्रचार-प्रसार तथा विकास में अपना बहुत …

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भक्तिकाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

भक्तिकाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ संतन को कहा सीकरी सो काम ?आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरिनाम।जिनको मुख देखे दुख उपजत, तिनको करिबे परी सलाम। -कुंभनदास नाहिन रहियो मन में ठौरनंद नंदन अक्षत कैसे आनिअ उर और -सूरदास हऊं तो चाकर राम के पटौ लिखौ दरबार,अब का तुलसी होहिंगे नर के मनसबदार। -तुलसीदास आँखड़ियाँ झाँई …

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भक्ति काल के कवि

भक्ति काल के कवि (A) संत काव्य बीजक (1. रमैनी 2. सबद 3. साखी; संकलन धर्मदास) – कबीरदास बानी- रैदास ग्रंथ साहिब में संकलित (संकलन-गुरु अर्जुन देव)-नानक देव सुंदर विलाप-सुंदर दास रत्न खान, ज्ञानबोध-मलूक दास (B) सूफी काव्य हंसावली-असाइत चंदायन या लोरकहा-मुल्ला दाऊद मधुमालती-मंझन मृगावती-कुतबन चित्रावती-उसमान पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, कन्हावत-जायसी माधवानल कामकंदला-आलम ज्ञान दीपक-शेख …

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संत काव्य (Sant Kavya)

संत काव्य का सामान्य अर्थ है संतों के द्वारा रचा गया काव्य। हिन्दी में ‘संत काव्य’ कहा जाता है तो उसका अर्थ होता है निर्गुणोपासक ज्ञानमार्गी कवियों के द्वारा रचा गया काव्य। संत कवि : कबीर, नामदेव, रैदास, नानक, धर्मदास, रज्जब, मलूकदास, दादू, सुंदरदास, चरणदास, सहजोबाई आदि।सुंदरदास को छोड़कर सभी संत कवि कामगार तबके से …

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राम काव्य धारा

राम काव्य धारा जिन भक्त कवियों ने विष्णु के अवतार के रूप में राम की उपासना को अपना लक्ष्य बनाया वे ‘रामाश्रयी शाखा’ के कवि कहलाए। कुछ उल्लेखनीय राम भक्त कवि हैं- रामानंद, अग्रदास, ईश्वर दास, तुलसी दास, नाभादास, केशवदास, नरहरिदास आदि। राम भक्ति काव्य धारा के सबसे बड़े और प्रतिनिधि कवि है तुलसी दास। …

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हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

घनानंद कवित्त पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

घनानंद कवित्त पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न “नीर भीज्यौ जीवतऊ गुड़ी लौं उड़्यौ रहै” में अलंकार है:१. विभावना ✔२. रूपक३. व्यतिरेक४. विरोधाभास। डॉ ग्रियर्सन ने अपने ग्रंथ के किस अध्याय को रीतिकाल नाम दिया है:१. 5 वें२. 7 वें✔३. 8 वें४. 6 वें “भूषण बिनु न बिराजई कविता बनिता मित्त” किसकी पंक्ति है:१. भूषण२. केशव✔३. घनानंद४. तुलसी …

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