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साहित्यकार

लीलाधर जगूड़ी का साहित्यिक परिचय

लीलाधर जगूड़ी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी कवि है जिनके कृति अनुभव के आकाश में चांद को १९९७ मे पुरस्कार प्राप्त हुआ। लीलाधर जगूड़ी का साहित्यिक परिचय जन्म :- 1 जुलाई 1944, जन्म स्थान:- धंगड़, टिहरी

केदारनाथ अग्रवाल का साहित्यिक परिचय

केदारनाथ अग्रवाल (1 अप्रैल 1911 - 22 जून 2000 ) प्रमुख हिन्दी कवि थे। 1 अप्रैल 1911 को उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के कमासिन गाँव में हनुमान प्रसाद गुप्ता व घसीटो देवी के घर हुआ था। रचनाओं की सूची गुलमेंहदीहे मेरी तुमजमुन जल तुमजो

राधाकृष्ण दास का साहित्यिक परिचय

राधाकृष्ण दास (1865- 2 अप्रैल 1907) हिन्दी के प्रमुख सेवक तथा साहित्यकार थे। वे भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के फुफेरे भाई थे। शारीरिक कारणों से औपचारिक शिक्षा कम होते हुए भी स्वाध्याय से इन्होने हिन्दी, बंगला, गुजराती, उर्दू, आदि का अच्छा ज्ञान

भिखारीदास का साहित्यिक परिचय

भिखारीदास रीतिकाल के श्रेष्ठ हिन्दी कवि थे। कवि और आचार्य भिखारीदास का जन्म प्रतापगढ़ के निकट टेंउगा नामक स्थान में सन् 1721 ई० में हुआ था। इनकी मृत्यु बिहार में आरा के निकट भभुआ नामक स्थान पर हुई। भिखारी दास की रचनाएँ

नंददास का साहित्यिक परिचय

नंददास का जन्म सनाढ्य ब्राह्मण कुल में वि ० सं ० 1420 में अन्तर्वेदी रामपुर (वर्तमान श्यामपुर) में हुआ जो वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में है। ये संस्कृत और बृजभाषा के अच्छे विद्वान थे। भागवत की रासपंचाध्यायी का भाषानुवाद इस

नामदेव का साहित्यिक परिचय

नामदेव का साहित्यिक परिचय नामदेव भारत के प्रसिद्ध संत थे। भक्त नामदेव महाराज का जन्म 26 अकटुबर 1270 (शके 1192) प्रथम संवत्सर कार्तिक शुक्ल एकादशी को में महाराष्ट्र के सातारा जिले में कृष्णा नदी के किनारे बसे नरसीबामणी नामक गाँव में एक

कुलपति मिश्र का साहित्यिक परिचय

कुलपति मिश्र आगरा के रहने वाले 'माथुर चौबे' थे और महाकवि बिहारी के भानजे के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनके पिता का नाम 'परशुराम मिश्र' था। कुलपति जी जयपुर के महाराज जयसिंह के पुत्र महाराज रामसिंह के दरबार में रहते थे। कविता काल इनके 'रस

  शबरपा का साहित्यिक परिचय

शबरपा सिद्ध साहित्य की रचना करने वाले प्रमुख सिद्धों में से एक हैं। इनका जन्म 780 ई॰ में क्षत्रिय कुल में हुआ था। इन्होंने सरहपा से ज्ञान प्रप्त किया। शबरों की तरह जीवन व्यतीत करने के कारण इन्हें शबरपा कहा जाने लगा। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक

पद्माकर का साहित्यिक परिचय

रीति काल के ब्रजभाषा कवियों में पद्माकर (1753-1833) का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वे हिंदी साहित्य के रीतिकालीन कवियों में अंतिम चरण के सुप्रसिद्ध और विशेष सम्मानित कवि थे। पद्माकर के पिता मोहनलाल भट्ट सागर में बस गए थे। यहीं पद्माकर जी का