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हिंदी साहित्य का छायावाद

छायावादोत्तर युग (1936 ई० के बाद)

छायावादोत्तर युग (1936 ई० के बाद) छायावादोत्तर युग में हिन्दी काव्यधारा बहुमुखी हो जाती है- (A) पुरानी काव्यधारा राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', सोहन लाल

छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर

छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर (i) छायावाद में कविता करने का उद्देश्य 'स्वान्तः सुखाय' है जबकि प्रगतिवाद में 'बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' है। (ii) छायावाद में वैयक्तिक भावना प्रबल है जबकि प्रगतिवाद में सामाजिक भावना। (iii) छायावाद में

छायावादोत्तर युगीन प्रसिद्ध पंक्तियाँ

छायावादोत्तर युगीन प्रसिद्ध पंक्तियाँ (विविध) HINDI SAHITYA श्वानो को मिलता दूध वस्त्रभूखे बालक अकुलाते हैं -दिनकर लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,सिंहसान

छायावाद महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

छायावाद महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न 01-निराला की प्रथम काव्य संग्रह है-1)जूही की कली ✔2)अनामिका3)राम की शक्तिपूजा4)गीतिका प्रश्न 02:-कविता को "कल्पना के कानन की रानी" किसने कहा

छायावाद अर्थ विशेषता

छायावाद का अर्थ विद्वानों में मतभेद मुकुटधर पाण्डेय - 'रहस्यवाद',सुशील कुमार -'अस्पष्टता',महावीर प्रसाद द्विवेदी - 'अन्योक्ति पद्धति',रामचन्द्र शुक्ल - 'शैली वैचित्र्य',नंद दुलारे बाजपेयी - 'आध्यात्मिक छाया का भान',डॉ० नगेन्द्र -

छायावाद के महत्वपूर्ण स्तंभ : महादेवी वर्मा 

महादेवी वर्मा (1907-1987) महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७फ़र्रुख़ाबाद उत्तर प्रदेश, — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं।आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने