चंद्रगुप्त नाटक से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

चंद्रगुप्त नाटक से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

HINDI SAHITYA
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  • चन्द्रगुप्त (सन् 1931 में रचित) हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार जयशंकर प्रसाद का प्रमुख नाटक है।
  • इसमें विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस संघर्ष में भारत की विजय की थीम उठायी गयी है।
  • ‘चन्द्रगुप्त’, जय शंकर प्रसाद जी द्वारा लिखित नाटक है यह नाटक ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ के उत्थान के साथ-साथ उस समय के महाशक्तिशाली राज्य ‘मगध’ के राजा ‘धनानंद’ के पतन की कहानी भी कहता है।
  • यह नाटक ‘चाणक्य’ के प्रतिशोध और विश्वास की कहानी भी कहता है।
  • यह नाटक राजनीति, कूटनीति, षड़यंत्र, घात-आघात-प्रतिघात, द्वेष, घृणा, महत्वाकांक्षा, बलिदान और राष्ट्र-प्रेम की कहानी भी कहता है।
  • यह नाटक ग्रीक के विश्वविजेता सिकंदर या अलेक्सेंडर या अलक्षेन्द्र के लालच, कूटनीति एवं डर की कहानी भी कहता है।
  • यह नाटक प्रेम और प्रेम के लिए दिए गए बलिदान की कहानी भी कहता है।
  • यह नाटक त्याग और त्याग से सिद्ध हुए राष्ट्रीय एकता की कहानी भी कहता है।
  • हिन्दी के कालजयी रचनाकार जयशंकर प्रसाद का यह नाटक भारत के पहले साम्राज्य-निर्माता चंद्रगुप्त मौर्य और उसके मार्गदर्शक तथा महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य को केंद्र में रखकर लिखा गया है।

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