प्रपद्यवाद या नकेनवाद

हिन्दी काव्यशास्त्र

नकेनवाद की स्थापना सन् १९५६ में नलिन विलोचन शर्मा ने की थी। नकेनवाद को प्रपद्यवाद के नाम से भी जाना जाता है। इसे हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद की एक शाखा माना जाता है। प्रपद्यवाद या नकेनवाद के अंतर्गत तीन कवियों को लिया जाता है- नलिन विलोचन शर्मा, केशरी कुमार, नरेश। प्रयोगवाद का एक दूसरा पहलू बिहार के नलिनविलोचन शर्मा, केशरी और नरेश के … Read more

मनोविश्लेषणवाद

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मनोविश्लेषणवाद का प्रवर्तक फ्रायड को माना जाता है। फ्रायड ने मानव मस्तिष्क के तीन भाग चेतन, अवचेतन और अर्ध-चेतन किये। उन्होंने काम और व्यक्ति की दमित भावनाओं को सर्वाधिक महत्व दिया। फ्रायड के शिष्य एडलर ने काम की जगह अहम को मुख्य माना जबकी उनके एक अन्य शिष्य युंग ने दोनो को एक साथ रखा। … Read more

प्रतीकवाद

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प्रतीकवाद उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में कविता और अन्य कलाओं में फ्रांसीसी , रूसी और बेल्जियम मूल का कला आंदोलन था , जो मुख्य रूप से प्रकृतिवाद और यथार्थवाद के खिलाफ प्रतिक्रिया के रूप में प्रतीकात्मक छवियों और भाषा के माध्यम से पूर्ण सत्य का प्रतिनिधित्व करने की मांग करता था । आधुनिक काव्य का … Read more

कलावाद

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कलावाद कला के प्रति एक मत या दृष्टिकोण है। इसके तहत कला कला के लिए कहा गया। ‘कला कला के लिए’ फ्रेंच भाषा के सूत्र वाक्य ‘ल आर्त पोर ल आर्त’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘द आर्ट इज फॉर द आर्ट्स सेक’ का हिन्दी अनुवाद है। कलावाद के तहत साहित्य में उसके कलापक्ष पर अधिक बल … Read more

अस्तित्ववाद

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अस्तित्ववादी विचार या प्रत्यय की अपेक्षा व्यक्ति के अस्तित्व को अधिक महत्त्व देते हैं। इनके अनुसार सारे विचार या सिद्धांत व्यक्ति की चिंतना के ही परिणाम हैं। पहले चिंतन करने वाला मानव या व्यक्ति अस्तित्व में आया, अतः व्यक्ति अस्तित्व ही प्रमुख है, जबकि विचार या सिद्धांत गौण। उनके विचार से हर व्यक्ति को अपना … Read more

उत्तर आधुनिकतावाद

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धुनिकतावाद 1970 के दशक में एक क्रांतिकारी फ्रिंज आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन 1980 के दशक में ‘डिजाइनर दशक’ का प्रमुख रूप बन गया। ज्वलंत रंग, नाटकीयता और अतिशयोक्ति: सब कुछ एक स्टाइल स्टेटमेंट था। आधुनिकतावाद (Uttar adhuniktavad) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ल्योतार ने 1979 में किया। परंतु इसको व्यापक रूप में परिभाषित करने का कार्य … Read more

साहित्य में विविध वाद

साहित्य में विविध वाद उत्तर आधुनिकतावाद अति यथार्थवाद अस्तित्ववाद सरंचनावाद कलावाद प्रतीकवाद मिथक मनोविश्लेषण वाद विखंडनवाद स्वछंदतावाद रुपवाद

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