पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री

जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री

  • जॉन ड्राइडन कवि एवं नाटककार थे। इनकी प्रमुख कृति ‘ऑफ ड्रमेटी पोइजी’ (नाट्य-काव्य, 1668 ई०) है।
  • जॉन ड्राइडन को आधुनिक अंग्रेजी गद्य और आलोचना दोनों का जनक माना जाता है।
  • ड्राइडन ने ‘ऑफ ड्रेमेटिक पोइजी’ की रचना निबन्ध शैली में की जिसमें एक पात्र ‘नियेन्डर’ (नया आदमी) की भूमिका में ड्राइडन स्वयं उपस्थिति है।
  • ड्राइडन ने नाटक को मानव प्रकृति का यथातथ्य और जीवन्त प्रतिबिम्ब माना है।
  • ड्राइडन ने साहित्य के दो प्रयोजन आनन्द और शिक्षा पर देते हुए लिखा, ”कविता का मुख्य उद्देश्य आनन्द है। …. आनन्द के माध्यम से शिक्षा को कविता का साध्य बनाया जा सकता है।”
  • ड्राइडन ने काव्य-सृजन में प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व देते हुए लिखा है, ”उचित प्रतिभा प्रकृति का वरदान है।”

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