टैग: पाश्चात्य काव्यशास्त्री

  • प्लेटो पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    व्यवस्थित शास्त्र के रूप में पाश्चात्य साहित्यालोचन की पहली झलक प्लेटो (427-347 ई० पू०) के ‘इओन’ नामक संवाद में मिलती है। प्लेटो पाश्चात्य काव्यशास्त्री प्लेटो का संक्षिप्त जीवनवृत्त निम्नांकित है- जन्म-मृत्यु जन्म स्थान मूलनाम गुरुप्रदत्त नाम अरबी फारसी नाम अंग्रेजी नाम 427-347 एथेन्स अरिस्तोक्लीस प्लातोन अफ़लातून प्लेटो प्लेटो प्रत्ययवादी या आत्मवादी दार्शनिक था। इसके दर्शन…

  • अरस्तू पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    अरस्तू पाश्चात्य काव्यशास्त्री अरस्तू का विरेचन-सिद्धान्त अरस्तू ने कहा कि काव्य कल्पना पर आधारित होती है। वह वास्तविकता का चित्रण नहीं होता बल्कि उसका आधार सम्भावना है। काव्य वास्तव में अनुकरण है किंतु यही उसकी विशिष्टता है। लेकिन कवि वस्तुओं की पुनर्रचना करता है, नकल नहीं। अनुकरण के कारण ही काव्य आनंददायक होता है। उससे…

  • विलियम वर्डसवर्थ पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    विलियम वर्डसवर्थ पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    विलियम वर्डसवर्थ का संक्षिप्त जीवन वृत्त निम्नलिखित है- जन्म-मृत्यु जन्म-स्थान उपाधि मित्र अन्तिम संग्रह 1770-1850 इंग्लैण्ड पोयटलारिएट कोलरिज द प्रिल्यूड वर्डसवर्थ का प्रथम काव्य संग्रह ‘एन इवनिंग वॉक एण्ड डिस्क्रिप्टव स्केचैज’ सन् 1793 ई० में प्रकाशित हुआ।वर्डसवर्थ 1795 ई० में कोलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में ‘लिरिकल बैलेड्स’ नामक कविताओं का प्रथम संस्करण सन् 1798…

  • जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री जॉन ड्राइडन कवि एवं नाटककार थे। इनकी प्रमुख कृति ‘ऑफ ड्रमेटी पोइजी’ (नाट्य-काव्य, 1668 ई०) है। जॉन ड्राइडन को आधुनिक अंग्रेजी गद्य और आलोचना दोनों का जनक माना जाता है। ड्राइडन ने ‘ऑफ ड्रेमेटिक पोइजी’ की रचना निबन्ध शैली में की जिसमें एक पात्र ‘नियेन्डर’ (नया आदमी) की भूमिका में ड्राइडन…

  • लोंजाइनस पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    लोंजाइनस पाश्चात्य काव्यशास्त्री

    लोंजाइनस (मूल यूनानी नाम लोंगिनुस (‘Longinus’) का समय ईसा की प्रथम या तृतीय शताब्दी माना जाता है। लोंजाइनस के ग्रन्थ का नाम ‘पेरिहुप्सुस’ है। इस ग्रन्थ का प्रथम बार प्रकाशन सन् 1554 ई० में इतालवी विद्वान रोबेरतेल्लो ने करवाया था। ‘पेरिहुप्सुस’ मूलतः भाषणशास्त्र (रेटोरिक) का ग्रन्थ है। ‘पेरिहुप्सुस’ का सर्वप्रथम अंग्रेजी रूपान्तर जॉन हॉल ने सन्…

  • अभिव्यंजनावाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

    अभिव्यंजनावाद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

    अभिव्यञ्जनावाद एक आधुनिकतावादी आन्दोलन था जो २०वीं शताब्दी के आरम्भ में जर्मनी से आरम्भ हुआ था। पहले यह काव्य (पोएट्री) और चित्रकला के क्षेत्र में आया था। अभिव्यंजनावाद के प्रवर्तक बेनेदेत्तो क्रोचे (Benedetto Croce) मूलतः आत्मवादी दार्शनिक हैं। उनका उद्देश्य साहित्य में आत्मा की अन्तः सत्ता स्थापित करना था।। क्रोचे के अनुसार “अंतःप्रज्ञा के क्षणों में आत्मा की…

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