विलियम वर्डसवर्थ पाश्चात्य काव्यशास्त्री

पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

विलियम वर्डसवर्थ का संक्षिप्त जीवन वृत्त निम्नलिखित है- जन्म-मृत्यु जन्म-स्थान उपाधि मित्र अन्तिम संग्रह 1770-1850 इंग्लैण्ड पोयटलारिएट कोलरिज द प्रिल्यूड वर्डसवर्थ का प्रथम काव्य संग्रह ‘एन इवनिंग वॉक एण्ड डिस्क्रिप्टव स्केचैज’ सन् 1793 ई० में प्रकाशित हुआ।वर्डसवर्थ 1795 ई० में कोलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में ‘लिरिकल बैलेड्स’ नामक कविताओं का प्रथम संस्करण सन् 1798 … Read more

जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री

पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

जॉन ड्राइडन पाश्चात्य काव्यशास्त्री जॉन ड्राइडन कवि एवं नाटककार थे। इनकी प्रमुख कृति ‘ऑफ ड्रमेटी पोइजी’ (नाट्य-काव्य, 1668 ई०) है। जॉन ड्राइडन को आधुनिक अंग्रेजी गद्य और आलोचना दोनों का जनक माना जाता है। ड्राइडन ने ‘ऑफ ड्रेमेटिक पोइजी’ की रचना निबन्ध शैली में की जिसमें एक पात्र ‘नियेन्डर’ (नया आदमी) की भूमिका में ड्राइडन … Read more

लोंजाइनस पाश्चात्य काव्यशास्त्री

पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

लोंजाइनस (मूल यूनानी नाम लोंगिनुस (‘Longinus’) का समय ईसा की प्रथम या तृतीय शताब्दी माना जाता है। लोंजाइनस के ग्रन्थ का नाम ‘पेरिहुप्सुस’ है। इस ग्रन्थ का प्रथम बार प्रकाशन सन् 1554 ई० में इतालवी विद्वान रोबेरतेल्लो ने करवाया था। ‘पेरिहुप्सुस’ मूलतः भाषणशास्त्र (रेटोरिक) का ग्रन्थ है। ‘पेरिहुप्सुस’ का सर्वप्रथम अंग्रेजी रूपान्तर जॉन हॉल ने सन् … Read more

अरस्तू पाश्चात्य काव्यशास्त्री

पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

अरस्तू पाश्चात्य काव्यशास्त्री  प्लेटो के शिष्य अरस्तू ने कलाओं को अनुकरणात्मक मानते हुए भी उनके महत्त्व को स्वीकार किया। यह प्लेटो के विचारों से भिन्न दृष्टि थी। प्लेटो के विचार जहाँ नैतिक और सामाजिक हैं, वहीं अरस्तू की दृष्टि सौंदर्यवादी है। अरस्तू का विरेचन-सिद्धान्त इस सिद्धांत के अनुसार गम्भीर कार्यों की सफल और प्रभावशाली अनुकृति … Read more

प्लेटो पाश्चात्य काव्यशास्त्री

पाश्चात्य-काव्यशास्त्री

व्यवस्थित शास्त्र के रूप में पाश्चात्य साहित्यालोचन की पहली झलक प्लेटो (427-347 ई० पू०) के ‘इओन’ नामक संवाद में मिलती है। प्लेटो का संक्षिप्त जीवनवृत्त निम्नांकित है- जन्म-मृत्यु जन्म स्थान मूलनाम गुरुप्रदत्त नाम अरबी फारसी नाम अंग्रेजी नाम 427-347 एथेन्स अरिस्तोक्लीस प्लातोन अफ़लातून प्लेटो प्लेटो प्रत्ययवादी या आत्मवादी दार्शनिक था। इसके दर्शन के मुख्य विषय … Read more

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