यात्रा वृतांत के उद्देश्य व हिंदी साहित्य में यात्रा वृतांत

यात्रा वृतांत के उद्देश्य व हिंदी साहित्य में यात्रा वृतांत

सबसे पहले यात्रा वृतांत किसे कहते हैं ? ये जानते हैं,

  • यह साहित्य की वह विधा है जिसमें लेखक किसी स्थान की यात्रा का वर्णन करता है |और यह वर्णन रोचक होता है|
  • वर्णन के दौरान लेखक किसी स्थान के इतिहास,भूगोल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था आदि से पाठक को परिचित कराया जाता है|
  • यात्रा वृतांत मे संस्मरण और रेखाचित्र का मिलाजुला रूप देखने को मिलता है|
  • किसी भी यायावर( घूमने वाला व्यक्ति ) के अनुभव में विविधता होती है यात्रा वृतांत में यायावर के अनुभव की व्याख्या नहीं होती है, बल्कि निश्चित दृष्टिकोण से दर्शनीय स्थानों को देखा जाता है|
  • एक यात्री उन समस्त बिंदुओं को उल्लास और ऊर्जा के भाव से देखने का प्रयास करता है , जहां पर वह यात्रा के दौरान गया होता है|

यात्रा वृतांत के उद्देश्य

यात्रा वृतांत का 2 प्रमुख उद्देश्य होती है-

  1. सौंदर्य का बोध
  2. कौतूहल को जगाए रखना|

देश काल के संदर्भ में किसी भी पाठक की जानकारी को बढ़ाना यात्रा वृतांत का प्रमुख उद्देश्य होता है |

हिंदी साहित्य में यात्रा वृतांत

भारतेंदु

हिंदी में यात्रा वृतांत एक आधुनिक गध विधा के रूप में स्वीकृत है| भारतेंदु युग में स्वयं भारतेंदु ने विभिन्न स्थलों की यात्रा की और अपने अनुभवों को साझा किया|

जैसे- यात्रा वृतांत के रूप में उनके कुछ संस्मरण है- सरयू पार की यात्रा, लखनऊ की यात्रा, हरिद्वार की यात्रा|

श्रीधर पाठक

भारतेंदु युग में ही कुछ लेखकों के द्वारा विदेश यात्रा के वृतांत भी लिखे गए|इसी प्रकार द्विवेदी युग में भी विभिन्न यात्रा वृतांत लिखे गए.

श्रीधर पाठक की देहरादून ,शिमला यात्रा |स्वामी सत्यदेव परिव्राजक की “मेरी कैलाश यात्रा” अमेरिका भ्रमण आदि |

राहुल सांकृत्यायन

सबसे महत्वपूर्ण यात्रा वृतांत लेखक राहुल सांकृत्यायन माने जाते हैं उन्होंने विभिन्न देशों की यात्रा की ओर यात्रा में आने वाली कहानियों को बताने के साथ-साथ उस स्थान विशेष कि प्राकृतिक संपदा , सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक घटनाओं को भी बारी बारी से प्रस्तुत किया जैसे-किन्नर देश में, दार्जिलिंग परिचय, यात्रा के पन्ने आदि|

अज्ञेय

बाद में चलकर अज्ञेय ने अपनी यात्रा वृतांत के द्वारा विदेशी अनुभवों को भी एक भी एक कहानीकार की रोचकता और यात्री के रोमांचक के साथ प्रस्तुत किया है|”एक बूंद सहसा उछली” में यूरोप और अमेरिका की यात्राओं को प्रस्तुत किया है|

मोहन राकेश ने अपनी यात्रा वृतांत “आखिरी चट्टान” में दक्षिण भारत की यात्राओं का वर्णन किया है| निर्मल वर्मा ने” चिडो पर चांदनी” नामक यात्रा वृतांत में अपने यूरोप यात्रा का वर्णन किया है| इस यात्रा वृतांग में वे वहां की इतिहास, दर्शन और संस्कृति से सीधा संवाद करते हैं| उनके यात्रा में संवेदनशीलता के साथ साथ बौद्धिक गहराई का भी अनुभव होता है |

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