गोस्वामी तुलसीदास का साहित्यिक परिचय

गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के महान सन्त कवि थे। रामचरितमानस इनका गौरव ग्रन्थ है। इन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। तुलसीदास जी रामानंदी के बैरागी साधु थे।

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जन्म

अधिकांश विद्वान तुलसीदास का जन्म स्थान राजापुर को मानने के पक्ष में हैं।  यद्यपि कुछ इसे सोरों शूकरक्षेत्र भी मानते हैं। 
 आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था। संवत् 1511 श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं दम्पति के यहाँ तुलसीदास का जन्म हुआ। 

बचपन

भगवान शंकरजी की प्रेरणा से रामशैल पर रहनेवाले श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी (नरहरि बाबा) ने इस रामबोला के नाम से बहुचर्चित हो चुके इस बालक को ढूँढ निकाला और विधिवत उसका नाम तुलसीराम रखा।

ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, गुरुवार, संवत् १५८३ को २९ वर्ष की आयु में राजापुर से थोडी ही दूर यमुना के उस पार स्थित एक गाँव की अति सुन्दरी भारद्वाज गोत्र की कन्या रत्नावली के साथ उनका विवाह हुआ।

रामचरितमानस की रचना

संवत्‌ १६३१ का प्रारम्भ हुआ। दैवयोग से उस वर्ष रामनवमी के दिन वैसा ही योग आया जैसा त्रेतायुग में राम-जन्म के दिन था। उस दिन प्रातःकाल तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारम्भ की। दो वर्ष, सात महीने और छ्ब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रन्थ सम्पन्न हुआ। संवत्‌ १६३३ के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम-विवाह के दिन सातों काण्ड पूर्ण हो गये।

शरीर परित्याग

संवत्‌ १६८० में श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को तुलसीदास जी ने “राम-राम” कहते हुए अपना शरीर परित्याग किया।

तुलसीदास की रचनाएँ 

अपने १२६ वर्ष के दीर्घ जीवन-काल में तुलसीदास ने कालक्रमानुसार निम्नलिखित कालजयी ग्रन्थों की रचनाएँ कीं –

  • गीतावली (1571),
  • कृष्ण-गीतावली (1571),
  • रामचरितमानस (1574),
  • पार्वती-मंगल (1582),
  • विनय-पत्रिका (1582),
  • जानकी-मंगल (1582),
  • रामललानहछू (1582),
  • दोहावली (1583),
  • वैराग्यसंदीपनी (1612),
  • रामाज्ञाप्रश्न (1612),
  • सतसई,
  • बरवै रामायण (1612),
  • कवितावली (1612),
  • हनुमान बाहुक
गुरु/शिक्षकनरहरिदास
दर्शनवैष्णव
खिताब/सम्मानगोस्वामी, अभिनववाल्मीकि, इत्यादि

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