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हिंदी साहित्य का प्रगतिवाद

प्रगतिवाद के कवि

प्रगतिवाद के कवि नागार्जुन (1910-1998)केदारनाथ अग्रवाल (1911-2000)रामविलास शर्मा (1912-2000)शिवमंगल सिंह सुमन (1915-2002)त्रिलोचन (1917-2007)मुक्तिबोध (1917-1964)रांगेय राघव (1923-1964)

छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर

छायावाद व प्रगतिवाद में अंतर (i) छायावाद में कविता करने का उद्देश्य 'स्वान्तः सुखाय' है जबकि प्रगतिवाद में 'बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' है। (ii) छायावाद में वैयक्तिक भावना प्रबल है जबकि प्रगतिवाद में सामाजिक भावना। (iii) छायावाद में

हिंदी साहित्य का प्रगतिवाद

छायावादोत्तर युग (1936 ई० के बाद) छायावादोत्तर युग में हिन्दी काव्यधारा बहुमुखी हो जाती है- पुरानी काव्यधारा राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा सियाराम शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर,