छायावाद चतुष्टय के प्रमुख दर्शन

छायावादी प्रवृत्तियाँ जिस युग के काव्य में पाई गईं उस साहित्यिक युग को छायावादी युग के नाम से जाना गया। इन प्रवृत्तियों में लिखने वाले लेखकों को छायावादी कवि कहा गया। छायावाद विशेष रूप से हिंदी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की वह काव्य-धारा है जो लगभग ई.स. १९१८ से १९३६ तक की प्रमुख युगवाणी रही। … Read more

छायावाद के महत्वपूर्ण स्तंभ : महादेवी वर्मा 

महादेवी वर्मा (1907-1987) महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७फ़र्रुख़ाबाद उत्तर प्रदेश, — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है।भारत के साहित्य आकाश में महादेवी वर्मा का नाम ध्रुव तारे की … Read more

error: Content is protected !!