हिंदी साहित्य का भारतेन्दु युग

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भारतेंदु युग प्रसिद्ध पंक्तियाँ

भारतेंदु युग प्रसिद्ध पंक्तियाँ रोवहु सब मिलि, आवहु ‘भारत भाई’ ।हा! हा! भारत-दुर्दशा न देखी जाई।। -भारतेन्दु कठिन सिपाही द्रोह अनल जा जल बल नासी।जिन भय सिर न हिलाय सकत कहुँ भारतवासी।। -भारतेन्दु यह जीय धरकत यह न होई कहूं कोउ सुनि लेई। कछु दोष दै मारहिं और रोवन न दइहिं।। -प्रताप नारायण मिश्र अमिय …

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भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का साहित्यिक परिचय

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का साहित्यिक परिचय: आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। इनका मूल नाम ‘हरिश्चन्द्र’ था, ‘भारतेन्दु’ उनकी उपाधि थी। रीतिकाल की विकृत सामन्ती संस्कृति की पोषक वृत्तियों को छोड़कर स्वस्थ परम्परा के बीज बोए। हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का प्रारम्भ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना जाता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी का हिंदी …

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भारतेंदु युग के काव्य प्रवृत्तियाँ

भारतेंदु युग के काव्य प्रवृत्तियाँ भारतेंदु युग ने हिंदी कविता को रीतिकाल के शृंगारपूर्ण और राज-आश्रय के वातावरण से निकाल कर राष्ट्रप्रेम, समाज-सुधार आदि की स्वस्थ भावनाओं से ओत-प्रेत कर उसे सामान्य जन से जोड़ दिया। इस युग की काव्य प्रवृत्तियाँ निम्नानुसार हैं:- देशप्रेम की व्यंजना  अंग्रेजों के दमन चक्र के आतंक में इस युग …

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हिन्दी नाटक

भारतेंदु युग के प्रमुख नाटककार एवं उनके नाटक

भारतेंदु युग के प्रमुख नाटककार एवं उनके नाटक प्राणचंद चौहान –रामायण महानाटक महाराज विश्वनाथ सिंह –आनंद रघुनंदन गोपालचंद्र गिरिधर दास- नहुष भारतेंदु हरिश्चंद्र –विद्यासुंदर, रत्नावली, पाखण्ड विडंबन, धनंजय विजय, कर्पूर मंजरी, भारत-जननी, मुद्राराक्षस, दुर्लभ बंधु (उपर्युक्त सभी अनूदित); वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, सत्यहरिश्चंद्र, श्रीचन्द्रावली, विषस्य विषमौषधम, भारत-दुर्दशा, नीलदेवी, अँधेरे नगरी, सती प्रताप, प्रेम योगिनी …

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हिंदी साहित्य का भारतेन्दु युग

हिन्दी नवजागरण के अग्रदूत भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाम पर हिंदी साहित्य का भारतेन्दु युग का नामकरण किया गया है। हिंदी साहित्य का भारतेन्दु युग (पुनर्जागरण काल) 1857-1900 ई. भारतेन्दु जी ने राजा शिवप्रसाद ‘सितारे-ए-हिन्दी’ व राजा लक्ष्मणसिंह की भाषाओं के बीच का मार्ग अपनाया। इनका रचनाकाल 1850 से 1885 ई. तक रहा है 35 वर्ष …

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