भ्रमरगीतसार परिचय

भ्रमरगीतसार परिचय हिन्दी काव्यधारा में सगुण भक्ति परंपरा में कृष्णभक्ति शाखा में सूरदासजी सूर्य के समान दैदिप्तमान हैं। सूरदासजी की भक्ति और श्रीकृष्ण-कीर्तन की तन्मयता के बारे में उचित ही लिखा है – ‘आचार्यों की छाप लगी हुई आठ वीणाएं श्रीकृष्ण की प्रेमलीला का कीर्तन करने उठीं जिनमें सबसे उंची, सुरीली और मधुर झनकार अंधे … Read more

सूरदास का साहित्यिक परिचय

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सूरदास का साहित्यिक परिचय: वैसे तो हिंदी की काव्य उद्यान कितने ही रंग-बिरंगे और सुगंधित फूल खिले किंतु जैसा सौरभ सूरदास की रचनाओं का है , वैसा और किसी भी कवि की रचनाओं का नहीं है. इसलिए किसी सहृदय आलोचक ने ‘ सूर- सूर, तुलसी- शशि ‘कहकर सूरदास को हिन्दी काव्य के आकाश का सूर्य … Read more

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