हिंदी साहित्य का उपन्यास

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हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास

हिन्दी की प्रथम महिला उपन्यासकार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ को माना जाता है। इन्होंने सन् 1890 ई. में ‘सुहासिनी’ नामक उपन्यास लिखा। ब्रजरत्नदास अनुसार ‘साध्वी सती प्राण अबला’ का मूल नाम मल्लिका देवी था। हिन्दी की महिला उपन्यासकार एवं उपन्यास निम्नांकित हैं- उषा प्रियंवदा- (1) पचपन खम्भे लाल दीवारें (1961), (2) रुकोगी नहीं राधिका (1967), (3) …

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हिन्दी के प्रमुख उपन्यास और उनके प्रमुख पात्र

मनोहर श्याम जोशी अपने उपन्यासों को ‘गप्प बाइस्कोप’ कहते है। ‘मुन्नी मोबाइल’, ‘तीसरी ताली’ उपन्यास के लिए सन् 2012 का ‘इन्दु अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान’ प्रदान किया गया है। ‘ग्लोबल गाँव का देवता’ उपन्यास रणेन्द्र ने लिखा है। इसमें आदिवासी समाज का चित्रण है। इला डालमिया ने कवि अज्ञेय के जीवन पर केन्द्रित ‘छत पर अपर्णा’ …

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हिंदी उपन्यास का विकास

हिंदी उपन्यास का विकास हिंदी उपन्यास का आरम्भ हिंदी के प्रारंभिक उपन्यास प्रेमचंद पूर्व उपन्यास { प्रथम उत्थान } प्रेमचंद युग { द्वितीय उत्थान } प्रेमचंदोत्तर युग { तृतीय उत्थान } आधुनिकता बोध के उपन्यास { चतुर्थ उत्थान } महिला उपन्यासकार हिंदी दलित उपन्यास का विकास हिंदी के प्रमुख उपन्यास हिंदी के प्रमुख उपन्यासकार

मैला आँचल – फणीश्वरनाथ ‘रेणु’

फणीश्वर नाथ ‘ रेणु ‘ का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के अररिया जिले में फॉरबिसगंज के पास औराही हिंगना गाँव में हुआ था। उस समय यह पूर्णिया जिले में था। उनकी शिक्षा भारत और नेपाल में हुई। प्रारंभिक शिक्षा फारबिसगंज तथा अररिया में पूरी करने के बाद रेणु ने मैट्रिक नेपाल के विराटनगर के विराटनगर आदर्श विद्यालय से कोईराला परिवार में रहकर की। इन्होने इन्टरमीडिएट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1942 में की जिसके बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। बाद में 1950 में उन्होने नेपाली क्रांतिकारी आन्दोलन में भी हिस्सा लिया जिसके परिणामस्वरुप नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई। पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ छात्र संघर्ष समिति में सक्रिय रूप से भाग लिया और जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति में अहम भूमिका निभाई। १९५२-५३ के समय वे भीषण रूप से रोगग्रस्त रहे थे जिसके बाद लेखन की ओर उनका झुकाव हुआ। उनके इस काल की झलक उनकी कहानी तबे एकला चलो रे में मिलती है। उन्होने हिन्दी में आंचलिक कथा की नींव रखी। सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय, एक समकालीन कवि, उनके परम मित्र थे। इनकी कई रचनाओं में कटिहार के रेलवे स्टेशन का उल्लेख मिलता है।

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गोदान उपन्यास – प्रेमचंद

गोदान प्रेमचंद का हिंदी उपन्यास है जिसमें उनकी कला अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँची है। गोदान में भारतीय किसान का संपूर्ण जीवन – उसकी आकांक्षा और निराशा, उसकी धर्मभीरुता और भारतपरायणता के साथ स्वार्थपरता ओर बैठकबाजी, उसकी बेबसी और निरीहता- का जीता जागता चित्र उपस्थित किया गया है। उसकी गर्दन जिस पैर के नीचे दबी है उसे सहलाता, …

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आषाढ़ का एक दिन नाटक का परिचय

आषाढ़ का एक दिन एक त्रिखंडीय नाटक है। आषाढ़ का एक दिन कथानक :- प्रथम खंड :- प्रथम खंड में युवक कालिदास अपने हिमालय में स्थित गाँव में शांतिपूर्वक जीवन गुज़़ार रहा है और अपनी कला विकसित कर रहा है। वहाँ उसका एक युवती, मल्लिका, के साथ प्रेम-सम्बन्ध भी है। नाटक का पहला रुख़ बदलता है जब …

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हिंदी साहित्य के उपन्यासकार

हिंदी साहित्य के उपन्यासकार उपन्यासकार उपन्यास श्रद्धाराम फिल्लौरी भाग्यवती लाला श्रीनिवासदास परीक्षागुरू बालकृष्ण भट्ट नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान भारतेंदु हरिश्चंद्र पूर्ण प्रकाश, चंद्रप्रभा देवकीनंदन खत्री चंद्रकांता, नरेंद्रमोहिनी, वीरेंद्रवीर अथवा कटोरा भर खून, कुसुमकुमारी, चंद्रकांता संतति, भूतनाथ मेहता लज्जाराम शर्मा धूर्त रसिकलाल, स्वतंत्र रमा और परतंत्र लक्ष्मी, हिंदू गृहस्थ, आदर्श दम्पति, सुशीला विधवा, आदर्श …

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