जैनेंद्र कुमार का साहित्यिक परिचय

जैनेंद्र कुमार का साहित्यिक परिचय : जैनेंद्र कुमार का जन्म २ जनवरी सन १९०५, में अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ। उनके बचपन का नाम आनंदीलाल था। २४ दिसम्बर १९८८ को उनका निधन हो गया। 

प्रकाशित कृतियाँ

उपन्यासः 

‘परख’ (१९२९), ‘सुनीता’ (१९३५), ‘त्यागपत्र’ (१९३७), ‘कल्याणी’ (१९३९), ‘विवर्त’ (१९५३), ‘सुखदा’ (१९५३), ‘व्यतीत’ (१९५३) तथा ‘जयवर्धन’ (१९५६)।

कहानी संग्रहः 

‘फाँसी’ (१९२९), ‘वातायन’ (१९३०), ‘नीलम देश की राजकन्या’ (१९३३), ‘एक रात’ (१९३४), ‘दो चिड़ियाँ’ (१९३५), ‘पाजेब’ (१९४२), ‘जयसंधि’ (१९४९) तथा ‘जैनेंद्र की कहानियाँ’ (सात भाग)।

निबंध संग्रहः 

‘प्रस्तुत प्रश्न’ (१९३६), ‘जड़ की बात’ (१९४५), ‘पूर्वोदय’ (१९५१), ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’ (१९५३), ‘मंथन’ (१९५३), ‘सोच विचार’ (१९५३), ‘काम, प्रेम और परिवार’ (१९५३), तथा ‘ये और वे’ (१९५४)।

अनूदित ग्रंथः

 ‘मंदालिनी’ (नाटक-१९३५), ‘प्रेम में भगवान’ (कहानी संग्रह-१९३७), तथा ‘पाप और प्रकाश’ (नाटक-१९५३)।

सह लेखनः

 ‘तपोभूमि’ (उपन्यास, ऋषभचरण जैन के साथ-१९३२)।

संपादित ग्रंथः

 ‘साहित्य चयन’ (निबंध संग्रह-१९५१) तथा ‘विचारवल्लरी’ (निबंध संग्रह-१९५२)। (सहायक ग्रंथ- जैनेंद्र- साहित्य और समीक्षाः रामरतन भटनागर।)

हिंदी साहित्य में स्थान

  • जैनेन्द्र का सबसे बड़ा योगदान हिन्दी गद्य के निर्माण में था। इनकी मुख्य देन उपन्यास तथा कहानी है। एक साहित्य विचारक के रूप में भी इनका स्थान मान्य है। 
  • हिन्दी कहानी ने प्रयोगशीलता का पहला पाठ जैनेन्द्र से ही सीखा। जैनेन्द्र ने हिन्दी को एक पारदर्शी भाषा और भंगिमा दी, एक नया तेवर दिया, एक नया `सिंटेक्स’ दिया। 

आज के हिन्दी गद्य पर जैनेन्द्र की अमिट छाप है।

–रवींद्र कालिया

पुरस्कार / सम्मान

१९७१ में पद्म भूषण
१९७९ में साहित्य अकादमी पुरस्कार

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