Monthly Archives

August 2021

लिंग

लिंग के अर्थ 'लिंग' संस्कृत भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'चिह्न' या 'निशान'। चिह्न या निशान किसी संज्ञा का ही होता है। 'संज्ञा' किसी वस्तु के नाम को कहते है और वस्तु या तो पुरुषजाति की होगी या स्त्रीजाति की। एक, अप्रणिवाचक

अव्यय की परिभाषा भेद व क्रिया विशेषण

'अव्यय' ऐसे शब्द को कहते हैं, जिसके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक इत्यादि के कारण कोई विकार उत्पत्र नही होता। ऐसे शब्द हर स्थिति में अपने मूलरूप में बने रहते है। चूँकि अव्यय का रूपान्तर नहीं होता, इसलिए ऐसे शब्द अविकारी होते हैं।

पर्यायवाची शब्द

'पर्याय' का अर्थ है- 'समान' तथा 'वाची' का अर्थ है- 'बोले जाने वाले' अर्थात जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें 'पर्यायवाची शब्द' कहते हैं। पर्यायवाची शब्द (Synonyms Words)की परिभाषाकुछ विशिष्ठ पर्यायवाची शब्द आगे दी जा रही

वर्ण की परिभाषा भाग व भेद

वर्ण(Phonology)- वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके खंड या टुकड़े नहीं किये जा सकते।इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं- वह सबसे छोटी ध्वनि जिसके और टुकड़े नहीं किए जा सकते, वर्ण कहलाती है। वर्ण की परिभाषा-वर्ण के भेदस्वर के भेदमूल स्वर के

प्रत्यय की परिभाषा

जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय कहलाते है। प्रत्यय (Suffix)की परिभाषाप्रत्यय के भेद(क)(ख)(ग़)(घ)कृत् प्रत्यय के भेदहिंदी के कृत्-प्रत्यय (Primary suffixes)संस्कृत के कृत्-प्रत्यय और संज्ञाएँहिंदी

उपसर्ग की परिभाषा

उपसर्ग उस शब्दांश या अव्यय को कहते है, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है। उपसर्ग की परिभाषा उपसर्ग की विशेषताउपसर्ग की संख्या(1) संस्कृत के उपसर्ग(2)हिंदी के उपसर्ग(3)उर्दू के उपसर्ग(4) अंग्रेजी के उपसर्ग(5)