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कक्षा 7

ईदमहोत्सव: कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 6

ईदमहोत्सव: कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 6 (याकूब:, सलीम:, सलमा च इति त्रीणि मित्राणि गगनोन्मुखानि भूत्वा सायं द्रुष्टुं चेष्टन्ते । यतः हि ईदस्य चंद्रदर्शन नातीव सरलं।) याकूब: - अद्य चन्द्रस्य दर्शनं जातम् श्वः एव ईदस्य महोत्सवो भविष्यति । सलीम : - मित्र ! ईद दिवसस्य निर्णय: कः ? याकूब: - दिल्लीत: इमामो महोदयः करिष्यति। रात्री एव
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रायपुरनगरम् कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 4

रायपुरनगरम् कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 4 इदं अस्माकं रायपुर नगरं खारून नद्याः तटे रायपुरं अस्ति छत्तीसगढ़ प्रदेशस्य राजधानी रायपुरनगर अस्ति अस्य नगरस्य महत्वं प्राचीनकालादेव वर्तते इयं नगरी तडागानां नगरी इति कथ्यते। अत्र अष्टादशाधिकाः तडागाः सन्ति। अत्र अति प्राचीन खो खो तडागः बूढ़तडागः (विवेकानंद सरोवर: ) महाराज- बन्धः कंकाली तडागः
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प्रयाणगीतं कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 1

प्रयाणगीतं कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 1 चन्दनतुल्या भारतभूमिस्तपस्थली ग्रामो ग्रामः।बाला बाला देवी प्रतिमा वत्सोवत्सः श्रीरामः ॥मन्दिरवत् पावनं शरीरसर्वो मानव उपकारी।सिंहा इह खेलनका जाता गौरिह पूज्या जनयित्री ॥इह प्रभाते शङ्कध्वानः सायं सङ्गीतस्वान् ।बाला बाला देवी प्रतिमा वत्सोवत्सः श्रीरामः ॥ शब्दार्था:- तुल्या = समान, ग्रामो ग्रामः =
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छत्तीसगढ़स्य पर्वाणि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 2

छत्तीसगढ़स्य पर्वाणि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 1 मानवजीवने उत्सवानां महत्वं सर्वविदित मेव। छत्तीसगढ़ राज्ये बहवः उत्सवाः प्रचलिताः तेषु 'हरेली', 'तीजा', 'जवारा', 'जेठौनी', 'छेरछेरा पुन्नी' इत्यादयः मुख्याः सन्ति । एतेषु - शब्दार्थाः – सर्व=सभी, विदितमेव = परिचित ही हैं, बहवः = बहुत प्रचलिता:= प्रचलित, मुख्याः= प्रमुख, उत्सवानां =
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नीतिनवनीतानि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 16

नीतिनवनीतानि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 16 1. विद्या ददाति विनयं, विनयात् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मः ततः सुखम् ॥ शब्दार्था :- ददाति = देती है, विनयं= विनम्रता, पात्रताम् = योग्यता, आप्नोति = प्राप्त होती है, ततः = तब । अर्थ-विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है। योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख
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चाणक्यवचनानि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 5

चाणक्यवचनानि कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 5 1. गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्सिद्धिभूषयते विद्यां भोगे भूषयते धनम्॥ शब्दार्था:- भूषयते = शोभा होती है, कुलम् = वंश (परिवार)की, सिद्धि:= सफलता, भोगो = उपभोग। अर्थ- गुण से रूप की शोभा होती है, शील से -गुण कुल की प्रशंसा होती है, विद्या की शोभा सिद्धि से होती है और धन की शोभा उचित उपभोग
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गीताऽमृतम् कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 7

गीताऽमृतम् कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 7 1. वासांसि जीर्णानि यथा विहाय,नवानि गृहणति नरोऽवानि पराणि।तथा शरीराणि विहायजीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही। शब्दार्था: यथा = जिस प्रकार, नरो = मनुष्य, जीर्णानि = पुराने, वासांसि = वस्त्र को, विहाय = त्याग कर, तथा = उसी प्रकार, देही = आत्मा, संयाति = धारण करती है। अर्थ-जिस प्रकार मनुष्य
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स्थिर विद्युत कक्षा 7 विज्ञान पाठ 15

स्थिर विद्युत कक्षा 7 विज्ञान पाठ 15 स्मरणीय तथ्य 1 आवेशित वस्तुएँ- विद्युत् आवेशों के प्रवाह को विद्युत् धारा कहते हैं। 2 कुछ वस्तुएँ अन्य विशेष पदार्थों से रगड़े जाने पर आवेश ग्रहण कर लेती है। जिन वस्तुओं पर आवेश होता है, वह आवेशित वस्तुएँ कहलाती हैं। 3. शीशे की छड़ पर धन आवेश उत्पन्न हो जाता है जब उसे रेशम से रगड़ते हैं। 4.
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सजीवों में नियंत्रण एवं समन्वय कक्षा 7 विज्ञान पाठ 16

सजीवों में नियंत्रण एवं समन्वय कक्षा 7 विज्ञान पाठ 16 स्मरणीय तथ्य 1. मस्तिष्क यह शरीर का कोमल एवं महत्वपूर्ण अंग है, जो खोपड़ी के अन्दर सुरक्षित रहता है। 2. मेरुरज्जु मस्तिष्क का पिछला भाग पतला होकर लम्बी बेलनाकार नली का रूप ले लेता है, इसे मेरुरज्जु कहते हैं। 3. तंत्रिकाएं तंत्रिकाएँ धागे के समान रचनाएँ हैं जो शरीर में जाल के समान
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कंकाल जोड़ एवं पेशियाँ कक्षा 7 विज्ञान पाठ 17

कंकाल जोड़ एवं पेशियाँ कक्षा 7 विज्ञान पाठ 17 स्मरणीय तथ्य 1. कशेरुक - छल्ले के जैसी हड्डियाँ जिनसे मिलकर मनुष्य की रीढ़ की हड्डी बनती है, को कशेरुक कहते हैं। 2. हसली - छाती के ऊपरी भाग में कंधे से लेकर गर्दन तक फैली हुई हड्डी को हसली कहते हैं। 3. संधि- हड्डियाँ आपस में जहाँ जुड़ती है वह स्थान जोड़ या संधि कहलाता है। 4. हमारा शरीर
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