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कक्षा 6

आलसीराम कक्षा 6 हिन्दी

आलसीराम अंगद उसका नाम था 'यथा नाम तथा गुण' वाली कहावत उस पर पूरे सौ पैसे ठीक उतरती थी। जहाँ वह बैठ जाता, फिर उठने का नाम न लेता। न घर की चिंता, न खाने-पीने की बेचारी पत्नी गाँव का - पीसना करके किसी तरह बच्चों का पेट पालती और अपने पति की राह देखा करती। अंगद कभी घर कूटना - ‍ जाता, कभी किसी के चौरे पर ही सोया रहता । लोगों को आश्चर्य होता यह
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सर्वधर्म समभाव कक्षा 6 हिन्दी

सर्वधर्म समभाव आज से लगभग चौदह सौ साल पहले की बात है। अरब के नखलिस्तान में एक गरीब बुढ़िया घर में जलाने के लिए सूखी लकड़ियाँ चुन रही थी । बहुत-सी लकड़ियाँ इकट्ठी हो जाने पर उसने उनका एक गट्ठा बना लिया। गट्ठा काफी वजनी था। निरंतर प्रयत्नों के बाद भी उस गट्ठे को बुढ़िया अपने सिर पर नहीं उठा पाई । हताश होकर सहायता के लिए इधर-उधर देखने लगी किन्तु
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शहीद की माँ कक्षा 6 हिन्दी

शहीद की माँ (जेल की कोठरी का दृश्य । रामप्रसाद 'बिस्मिल' सींखचों के पीछे, इधर-उधर घूमते हुए मस्ती से गा रहे हैं। ) "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है ज़ोर कितना बाजुए क़ातिल में है।सिर्फ मिट जाने की हसरत, इक दिले 'बिस्मिल' में हैअब तेरी हिम्मत की चर्चा, गैर की महफिल में है। (गीत की समाप्ति के साथ ही जेलर प्रवेश करता है। जेलर
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हम पंछी उन्मुक्त गगन के कक्षा 6 हिन्दी

हम पंछी उन्मुक्त गगन के हम पंछी उन्मुक्त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाएँगे, कनक- तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट जाएँगे। हम बहता जल पीनेवाले मर जाएँगे भूखे-प्यासे, कहीं भी है कटुक निबोरी कनक कटोरी की मैदा से। स्वर्ण-शृंखला के बंधन में अपनी गति, उड़ान सब भूले, बस सपनों में देख रहे हैं।तरु की फुनगी पर के झूले। ऐसे थे अरमान कि उड़ते नील गगन की
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दू ठन नान्हे कहानी कक्षा 6 हिन्दी

दू ठन नान्हे कहानी हीरा अउ ओस के बूंद हीरा ह जतका सुग्घर होथे ओतके महँगी घलो होथे। अइसने सुग्घर अउ महँगी हीरा ल जंगल म परे परे गजब दिन बीत गे । ओकर उपर कोनो मनखे के नजर नइ परिस, काबर के ओ हीरा के चरों-खुंट म काँदी जाम गे रहय । काँदी के एक ठन पत्ता ह ओकर उपर ओरमे रहय । काँदी के पत्ता म परे ओस के बूँद ह बड़ नीक लागत रहय । जब हवा म काँदी ह
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मेरा नया बचपन कक्षा 6 हिन्दी

मेरा नया बचपन बार-बार आती है मुझको मधुर याद, बचपन तेरी ।गया, ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी ||चिंता रहित खेलना, खाना, वह फिरना निर्भय स्वच्छंद ।कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद || ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआछूत किसने जानी ?हुई थी अहा, झोपड़ी और चीथड़ों में रानी ॥कि दूध के कुल्ले मैंने, चूस अँगूठा सुधा पिया।किलकारी कल्लोल
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समय नियोजन कक्षा 6 हिन्दी

समय नियोजन  हम अक्सर शिकायत किया करते हैं- समय के अभाव की, समय न मिलने की। पत्र का उत्तर न दे सका समयाभाव के कारण; कसरत नहीं कर सकता, समय न मिलने के कारण । किंतु यदि हम सही ढंग से आत्म-विश्लेषण करें तो हम पाएँगे कि हमारी ये शिकायतें अक्सर गलत होती हैं। हम अपने को समझ नहीं पाते और तभी ऐसी शिकायतें करते हैं यह हमारा आलस्य है, जो सदैव समय के अभाव
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सफेद गुड़ कक्षा 6 हिन्दी

सफेद गुड़ दुकान पर सफेद गुड़ रखा था, दुर्लभ था। उसे देखकर बार-बार उसके मुँह में पानी आ जाता था। आते-जाते वह ललचाई नजरों से गुड़ की ओर देखता, फिर मन मसोसकर रह जाता आखिरकार उसने हिम्मत की और घर जाकर माँ से कहा। माँ बैठी फटे कपड़े सिल रही थी। उसने आँख उठाकर कुछ देर दीन दृष्टि से उसकी ओर देखा, फिर ऊपर आसमान की ओर देखने लगी और बड़ी देर तक देखती
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बरखा आथे कक्षा 6 हिन्दी

बरखा आथे खेती ल हुसियार बनाय बर भुइयाँ म बरखा आथे। जिनगी ल ओसार बनाय बर भुइयाँ म बरखा आथे। सोन बनाय बर माटी ल सपना ल सिरतोन बनाय बर, आँसू ल बनिहार बनाय बर भुइयाँ म बरखा आथे। बाजत रहिथे झिमिर झिमिर रोज चिकारा अस बरखा के। बाजत रहिथे घड़-घड़-घड़ रोज नंगारा अस बरखा के। खुसियाली के चिट्ठी लेके बादर दुरिहा - दुरिहा जाथे, करिया करिया बादर ल
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दूँगी फूल कनेर के कक्षा 6 हिन्दी

दूँगी फूल कनेर के आना मेरे गाँव तुम्हें मैंदूंगी फूल कनेर के । (1) कच्चे, कुछ कच्चे कुछ पक्के घर हैं,एक पुराना ताल है ।सड़क बनेगी, सुनती हूँ,इसका नंबर इस साल है ।चखते आना टीले ऊपरकई पेड़ हैं बेर के |आना मेरे गाँव तुम्हें मैंदूंगी फूल कनेर के । (2) बाबा ने था पेड़ लगाया,बापू ने फल खाए हैं । भाई कैसे उसे काटने,को रहते ललचाए हैं ?मेरे
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