काव्यशास्त्र

‘काव्यशास्त्र’ काव्य और साहित्य का दर्शन तथा विज्ञान है। यह काव्यकृतियों के विश्लेषण के आधार पर समय-समय पर उद्भावित सिद्धान्तों की ज्ञानराशि है। काव्यशास्त्र के लिए पुराने नाम ‘साहित्यशास्त्र’ तथा ‘अलंकारशास्त्र’ हैं और साहित्य के व्यापक रचनात्मक वाङ्मय को समेटने पर इसे ‘समीक्षाशास्त्र’ भी कहा जाने लगा। संस्कृत आलोचना के अनेक अभिधानों में अलंकारशास्त्र ही नितान्त लोकप्रिय अभिधान है। इसके प्राचीन नामों में ‘क्रियाकलाप’ (क्रिया काव्यग्रंथ; कल्प विधान) वात्स्यायन द्वारा निर्दिष्ट 64 कलाओं में से अन्यतम है। राजशेखर द्वारा उल्लिखित “साहित्य विद्या” नामकरण काव्य की भारतीय कल्पना के ऊपर आश्रित है, परन्तु ये नामकरण प्रसिद्ध नहीं हो सके।

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काव्य-प्रयोजन

प्रयोजन का अर्थ है उद्देश्य। संस्कृत काव्यशास्त्र में काव्य की रचना के उद्देश्यों पर भी गंभीर विचार विमर्श हुआ है। भरत से लेकर विश्वनाथ तक ने काव्य का प्रयोजन पुरूषार्थ चतुष्ठ्य की प्राप्ति माना है। पुरुषार्थ चतुष्ठ्य से अभिप्राय धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति से है। काव्य प्रयोजन से तात्पर्य काव्य रचना के …

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हिन्दी काव्यशास्त्र

काव्य हेतु

काव्य हेतु का तात्पर्य कवि-कर्म के कारण से है । काव्य हेतु की परिभाषा काव्य-हेतु अर्थात काव्य की रचना करने वाले कवि में ऐसी कौन सी विलक्षण शक्ति /कारण/तत्व है जिसके द्वारा वह साधारण मानव होते हुये भी असाधारण काव्य की सर्जना कर देता है। काव्य-हेतु के अंतर्गत तीन साधन या कारण मुख्य रूप से …

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हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रस संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रस संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1 रस सूत्र किस आचार्य ने दिया है ?1 भरतमुनि✔️2 भामह3 मम्मट4 पंडितराज जगनन्नाथ 2 रस सूत्र के व्याख्याता आचार्यों की संख्या है –1, 4✔️2, 63, 54, 8 3 उत्प्तति वाद किस आचार्य का मत कहा जाता है –1 भट्टनायक2 भट्टलोलट✔️3 अभिनवगुप्त4 शंकुक 4 अनुमिति का सम्बन्ध है –1 साधारणीकरण2 चित्रतुरंग …

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हिन्दी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वक्रोक्ति संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वक्रोक्ति संप्रदाय वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1)अभिव्यंजनावाद का संबंध किस काव्य संप्रदाय से है??रीतिध्वनिवक्रोक्ति🎯अलंकार 🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯2)वक्रोक्ति सिद्धांत का प्रतिपादन किया–?वामनमम्मटभरतमुनिकुंतक🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯3)वक्रोक्ति के भेद है246🎯8 🎯🎯🎯🎯🎯🎯4)कुंतक का काव्य है??काव्यांलकारवक्रोक्ति जीवितम्🎯काव्यादर्शकाव्यप्रकाश 🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯5)निम्न मे से किस अलंकारीवादी आचार्यो ने वक्रोक्ति का निरुपण करने का प्रयास किया??भामहदंडी1+2 दोनो🎯इनमे से कोई नही 🎯🎯🎯🎯🎯🎯6)भामह वक्रोक्ति को ———-का पर्यायवाची स्वीकार करते है??अतिरेकअतिश्योक्ति🎯अन्योक्तिसभी 🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯7)आ.दंडी ने काव्य को …

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भारतीय काव्यशास्त्र नोट्स

भारतीय काव्यशास्त्र नोट्स ◼अलंकार-सम्प्रदाय के प्रवर्तक है? भामह (समय-छठी शती का मध्यकाल) ◼आचार्य भामह, उद्भट और रूद्रट। किस सम्प्रदाय के प्रमुख आचार्य है? अलंकार सम्प्रदाय ◼रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य है? आ.वामन( समय8वीं शती का उत्तरार्द्ध) ◼आचार्य दण्डी और वामन किस सम्प्रदाय के प्रमुख आचार्य है? रीति सम्प्रदाय ◼रीति को काव्य की आत्मा मानने वाले-रीतिवादी …

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हिंदी साहित्य के प्रमुख दर्शन और प्रवर्तक

हिंदी साहित्य के प्रमुख दर्शन और प्रवर्तक सांख्य-कपिल योग-पतंजलि न्याय-अक्षपाद गौतम-वैशेषिक उलूक -कणद मीमांसा/पूर्व-मीमांसा-जैमिनी वेदांत/उत्तर मीमांसा-बादरायण लोकायत/बार्हस्पत्य-चार्वाक (बृहस्पति का शिष्य) बौद्ध/क्षणिकवाद-गौतम बुद्ध जैन/स्यादवाद-महावीर अद्वैत मत-शंकराचार्य (भक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला) विशिष्टाद्वैत मत (श्री संप्रदाय)-रामानुज आचार्य (भक्ति आंदोलन का प्रारंभिक प्रतिपादक) द्वैताद्वैत/ भेदाभेद मत (सनकादि/रसिक संप्रदाय)निम्बार्क आचार्य द्वैत मत (ब्रह्म संप्रदाय)मध्वाआचार्य शुद्धाद्वैत मत (रूद्र …

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भरतमुनि संस्कृत काव्यशास्त्री

भरतमुनि संस्कृत काव्यशास्त्री भरत मुनि की ख्याति नाट्यशास्त्र के प्रणेता के रूप में है, पर उनके जीवन और व्यक्तित्व के विषय में इतिहास अभी तक मौन है। इस संबंध में विद्वानों का एक मत यह भी है कि भरतमुनि वस्तुतः एक काल्पनिक मुनि का नाम है। इन कतिपय मतों को छोड़ दे तो भरत मुनि …

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भामह संस्कृत काव्यशास्त्री

भामह संस्कृत काव्यशास्त्री आचार्य बलदेव उपाध्याय ने भामह का समय 6 शती का पूर्वार्द्ध निश्चित किया है। भामह कश्मीर के निवासी थे तथा इनके पिता का नाम रक्रिल गोमी था। सर्वप्रथम भामह ने ही अलंकार को नाट्यशास्त्र की परतन्त्रता से मुक्त कर एक स्वतंत्र शास्त्र या संप्रदाय के रूप में प्रतिष्ठित किया। भामह के प्रसिद्ध …

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दण्डी संस्कृत काव्यशास्त्री

दण्डी संस्कृत काव्यशास्त्री आचार्य दण्डी का समय सप्तम शती स्वीकार किया गया है। यह दक्षिण भारत के निवासी थे। दण्डी पल्लव नरेश सिंह विष्णु के सभा पंडित थे। दंडी अलंकार संप्रदाय से सम्बद्ध है तथा इनके तीन ग्रंथ उपलब्ध होते हैं ‘काव्यदर्श’, ‘दशकुमारचरित’ और ‘अवन्तिसुन्दरी कथा’। प्रथम ग्रंथ काव्यशास्त्र-विषयक है, और शेष दो गद्य काव्य …

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टी एस एलियट पाश्चात्य काव्यशास्त्री

टी एस एलियट की काव्य कृतियां: द वेस्टलैंड आपको वास्तविक ख्याति ‘द वेस्टलैंड’ (१९२२) द्वारा प्राप्त हुई। मुक्त छंद में लिखे तथा विभिन्न साहित्यिक संदर्भो एवं उद्धरणों से पूर्ण इस काव्य में समाज की तत्कालीन परिस्थिति का अत्यंत नैराश्यपूर्ण चित्र खींचा गया है। इसमें कवि ने जान बूझकर अनाकर्षक एवं कुरूप उपमानों का प्रयोग किया …

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