Sahity.in से जुड़ें @WhatsApp @Telegram @ Facebook @ Twitter

Browsing Category

हिंदी उपन्यास

हिंदी उपन्यास का आरम्भ श्रीनिवासदास के “परीक्षागुरु’ (१८४३ ई.) से माना जाता है। हिंदी के आरम्भिक उपन्यास अधिकतर ऐयारी और तिलस्मी किस्म के थे। अनूदित उपन्यासों में पहला सामाजिक उपन्यास भारतेंदु हरिश्चंद्र का “पूर्णप्रकाश’ और चंद्रप्रभा नामक मराठी उपन्यास का अनुवाद था। आरम्भ में हिंदी में कई उपन्यास बँगला, मराठी आदि से अनुवादित किए गए।

हिंदी में सामाजिक उपन्यासों का आधुनिक अर्थ में सूत्रपात प्रेमचंद (१८८०-१९३६) से हुआ। प्रेमचंद पहले उर्दू में लिखते थे, बाद में हिंदी की ओर मुड़े। आपके “सेवासदन’, “रंगभूमि’, “कायाकल्प’, “गबन’, “निर्मला’, “गोदान’, आदि प्रसिद्ध उपन्यास हैं, जिनमें ग्रामीण वातावरण का उत्तम चित्रण है। चरित्रचित्रण में प्रेमचंद गांधी जी के “हृदयपरिवर्तन’ के सिद्धांत को मानते थे। बाद में उनकी रुझान समाजवाद की ओर भी हुई, ऐसा जान पड़ता है। कुल मिलाकर उनके उपन्यास हिंदी में आधुनिक सामाजिक सुधारवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रेमचंद का साहित्यिक परिचय

प्रेमचंद का साहित्यिक परिचय मुंशी प्रेमचंद हिन्दी भाषा के मूर्धन्य कथाकार हैं, लगभग वैसे ही जैसे बंगला भाषा के शरतचंद्र है . यद्यपि दोनों की पृष्टभूमि भिन्न है. राजनीति के क्षेत्र में जो कुछ महात्मा गांधी थे, हिंदी कविता के

हिंदी साहित्य के उपन्यासकार

हिंदी साहित्य के उपन्यासकार श्रद्धाराम फिल्लौरी- भाग्यवती (1877) लाला श्रीनिवासदास- परीक्षागुरू (1882) बालकृष्ण भट्ट- रहस्य कथा,नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान भारतेंदु हरिश्चंद्र -पूर्ण प्रकाश,