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प्रसादोत्तर युग के नाटक कार

प्रसादोत्तर युग के नाटक कार डॉ० लक्ष्मीनारायण लाल –अंधा कुआँ, मादा कैक्टस, रातरानी, तीन आँखों वाली मछली, सुंदर रस, सूखा सरोवर, रक्तकमल, कलंकी, सूर्यमुखी, पंचपुरुष, मिस्टर अभिमन्यु, करफ्यू, सुगन पंछी, दर्पन, गंगामाटी, राक्षस का मंदिर मोहन राकेश –आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, पैरों तले की जमीन (अधूरा) सेठ गोविंददास- स्नेह या स्वर्ग, …

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