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हिंदी का विकास

विश्व की भाषाएँ एवं वर्गीकरण

विश्व की भाषाएँ एवं वर्गीकरण आपस में सम्बंधित भाषाओं को भाषा-परिवार कहते हैं। हिन्दी साहित्य : विश्व की भाषाएँ भाषाओं की तीन अवस्थाएँ इस समय संसार की भाषाओं की तीन अवस्थाएँ हैं। विभिन्न देशों की

हिन्दी की बोलियाँ

हिन्दी की बोलियाँ (उपभाषाएँ) हैं जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, हड़ौती,भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में अत्यन्त उच्च श्रेणी के

हिंदी की व्युत्पत्ति

हिंदी की व्युत्पत्ति हिन्दी शब्द का सम्बंध संस्कृत शब्द 'सिन्धु' से माना जाता है। यह सिन्धु शब्द ईरानी में जाकर ‘हिन्दू’, हिन्दी और फिर ‘हिन्द’ हो गया। बाद में ईरानी धीरे-धीरे भारत के अधिक भागों से परिचित होते गए और इस शब्द के अर्थ में

भारतीय आर्य भाषाएँ

हिन्द-आर्य भाषाएँ हिन्द-यूरोपीय भाषाओं की हिन्द-ईरानी शाखा की एक उपशाखा हैं, जिसे 'भारतीय उपशाखा' भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर भाषाएँ संस्कृत से जन्मी हैं। हिन्द-आर्य भाषाओं में आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा के 'घ', 'ध' और 'फ' जैसे व्यंजन

विश्व हिन्दी सम्मेलन(World Hindi Conference)

विश्व हिन्दी सम्मेलन का उद्देश्य उद्देश्य : UNO की भाषाओं में हिन्दी को स्थान दिलाना व हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना। क्रमतिथिआयोजन स्थलपहला10-14 जनवरी, 1975नागपुर (भारत); अध्यक्ष-शिवसागर राम गुलाम (मारिशस के तत्कालीन

हिन्दी भाषा के मानकीकरण की दिशा में उठाये गए महत्वपूर्ण कदम

हिन्दी भाषा के मानकीकरण की दिशा में उठाये गए महत्वपूर्ण कदम (1) राजा शिवप्रसाद 'सितारे-हिन्द' ने क ख ग ज फ पाँच अरबी-फारसी ध्वनियों के लिए चिह्नों के नीचे नुक्ता लगाने का रिवाज आरंभ किया। (2) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने