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हिंदी साहित्य का भक्तिकाल

विविध भक्ति सम्प्रदाय

विविध भक्ति सम्प्रदाय हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल 1. अद्वैत सम्प्रदाय (विशिष्टावाद)  -शंकराचार्य2. श्री सम्प्रदाय (विशिष्टाद्वैतवाद) -रामानुजाचार्य3. ब्रह्म सम्प्रदाय (द्वैत वाद) -मध्वाचार्य4. हंस सम्प्रदाय (सनकादि सम्प्रदाय,

भक्ति काल के विविध तथ्य

भक्ति काल के विविध तथ्य हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल भक्ति काल को 'हिन्दी साहित्य का स्वर्ण काल' कहा जाता है।भक्ति काल के उदय के बारे में सबसे पहले जार्ज ग्रियर्सन ने मत व्यक्त किया। वे ही 'ईसायत की देन' मानते हैं।ताराचंद के अनुसार

हिंदी के संत कवि

संत काव्य के प्रमुख कवि : संत काव्य के प्रवर्तक संत कबीर माने जाते हैं। इस विचारधारा के बीज आदिकाल के नाथ कवियों तथा संत नामदेव की रचनाओं में मिलते हैं। भक्ति कालीन निर्गुण संत कवियों में कबीर, दाद, नानक, रैदास, सुन्दरदास, मलूकदास आदि संतो

भक्तिकाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ

भक्तिकाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ संतन को कहा सीकरी सो काम ?आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरिनाम।जिनको मुख देखे दुख उपजत, तिनको करिबे परी सलाम। -कुंभनदास नाहिन रहियो मन में ठौरनंद नंदन अक्षत कैसे आनिअ उर और -सूरदास हऊं तो चाकर

भक्ति काल के कवि

भक्ति काल के कवि HINDI SAHITYA (A) संत काव्य बीजक (1. रमैनी 2. सबद 3. साखी; संकलन धर्मदास) - कबीरदासबानी- रैदासग्रंथ साहिब में संकलित (संकलन-गुरु अर्जुन देव)-नानक देवसुंदर विलाप-सुंदर दासरत्न खान, ज्ञानबोध-मलूक दास (B) सूफी

संत काव्य (Sant Kavya)

संत काव्य का सामान्य अर्थ है संतों के द्वारा रचा गया काव्य। HINDI SAHITYA हिन्दी में 'संत काव्य' कहा जाता है तो उसका अर्थ होता है निर्गुणोपासक ज्ञानमार्गी कवियों के द्वारा रचा गया काव्य। संत कवि : कबीर, नामदेव, रैदास, नानक,

राम काव्य धारा

राम काव्य धारा HINDI SAHITYA जिन भक्त कवियों ने विष्णु के अवतार के रूप में राम की उपासना को अपना लक्ष्य बनाया वे 'रामाश्रयी शाखा' के कवि कहलाए। कुछ उल्लेखनीय राम भक्त कवि हैं- रामानंद, अग्रदास, ईश्वर दास, तुलसी दास, नाभादास,

कृष्णभक्ति शाखा के कवि

कृष्णभक्ति शाखा के कवि सूरदास, नंददास, कृष्णदास, परमानंद, कुंभनदास, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी, गोविन्दस्वामी, हितहरिवंश, गदाधर भट्ट, मीराबाई, स्वामी हरिदास, सूरदास-मदनमोहन, श्रीभट्ट, व्यास जी, रसखान, ध्रुवदास, चैतन्य महाप्रभु । रचनाएँ

प्रेमाख्यानक काव्य

प्रेमाख्यानक काव्य' का अर्थ है जायसी आदि निर्गुणोपासक प्रेममार्गी सूफी कवियों के द्वारा रचित प्रेम-कथा काव्य। प्रेमाख्यानक काव्य को प्रेमाख्यान काव्य, प्रेमकथानक काव्य, प्रेम काव्य, प्रेममार्गी (सूफी) काव्य आदि नामों से भी पुकारा जाता

अष्टछाप के कवि

अष्टछाप के कवि अष्टछाप कवियों के अंतर्गत पुष्टिमार्गीय आचार्य वल्लभ के काव्य कीर्तनकार चार प्रमुख शिष्य तथा उनके पुत्र विट्ठलनाथ के भी चार शिष्य थे। HINDI SAHITYA आठों ब्रजभूमि के निवासी थे और श्रीनाथजी के समक्ष गान रचकर गाया