ध्वनि कक्षा 8 वीं विज्ञान अध्याय 10

महत्त्वपूर्ण विन्दु

  • दोलन- किसी वस्तु का उसकी माध्य स्थिति के दोनों ओर गति करना दोलन कहलाता है।
  • आयाम— कंपन करती हुई वस्तु अपनी माध्य स्थिति से जिस अधिकतम दूरी तक जाती है, उसे आयाम कहते हैं।
  • आवर्तकाल – एक दोलन पूरा करने के लिए लगे समय को आवर्तकाल कहते हैं।
  • आवृत्ति प्रति सेकण्ड होने वाले कंपनों की संख्या को कंपन की आवृत्ति कहते हैं।
  • प्रतिध्वनि ध्वनि के परावर्तन से प्रतिध्वनि बनती है।
  • पराश्रव्य ध्वनि वह ध्वनि जिसकी आवृत्ति 20,000 हर्टज से अधिक होती है तथा जिसे हम सुन नहीं पाते हैं, पराश्रव्य ध्वनि कहलाती है।
  • प्रत्येक वस्तु की अपनी विशिष्ट ध्वनि होती है।
  • किसी वस्तु में हलचल करने पर उसमें कम्पन उत्पन्न होता है एवं वह दोलन करने लगती है।
  • ध्वनि के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
  • निर्वात् में माध्यम नहीं होने के कारण ध्वनि सुनाई नहीं देती है।
  • मनुष्य 20 कम्पन/सेकण्ड से 20,000 कम्पन/सेकण्ड तक की आवृत्ति वाली ध्वनि को सुन सकता है। इन्हें श्रव्य ध्वनि कहते हैं।
  • मनुष्य का कान तीन प्रमुख अंगों से मिलकर बना होता है-बाह्यकर्ण, मध्यकर्ण, और अंत: कर्ण।
  • कुत्ता 40,000 कंपन प्रति सेकण्ड तक की तथा चमगादड़ 70,000 कंपन/से. की आवृत्ति सुन सकता है और उत्पन्न भी कर सकता है।
  • वायु में ध्वनि की चाल 20°C ताप पर लगभग 340 मीटर/सेकण्ड है। 16. अनियमित कंपनों से शीर उत्पन्न होता है। नियमित कंपन जो एक दूसरे में निश्चित संबंध रखते हैं मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
  • एक वयस्क पुरुष के वाक् तंतु की लंबाई 20 मिलीमीटर होती है।
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