आकाश दर्शन कक्षा 8 वीं विज्ञान अध्याय 1

आकाश दर्शन कक्षा 8 वीं विज्ञान

महत्वपूर्ण बिन्दु

1. तारे ऐसे खगोलीय पिंड है जो लगातार प्रकाश एवं ऊष्मा उत्सर्जित करते हैं।

2. तारा जितना पास हो उतना बड़ा व चमकदार तथा जितना दूर हो उतना ही छोटा दिखाई देगा।

3. दिन के समय आकाश में सूर्य के प्रकाश के कारण अन्य तारे दिखाई नहीं देते।

4. 3 लाख किमी. प्रति सेकंड की चाल से एक वर्ष में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है प्रकाश वर्ष कहलाता है। यह दूरी का मात्रक है। आकाशीय पिंड की दूरी इसी से मापते हैं।

5. उत्तर से दक्षिण की ओर दिखाई देने वाली तारों की धुंधली पट्टी को आकाश गंगा कहते हैं।

6. उत्तर दिशा में स्थित ध्रुव तारा स्थिर प्रतीत होता है। 7. तारों का ऐसा समूह जो विशेष आकृति बनाते हैं तारामंडल कहलाते हैं जैसे, उस मेडर, उस माइनर एवं ओरायन (कालपुरुष) ।

8. सूर्य की परिक्रमा करने वाली पिंड ग्रह कहलाते हैं।

9. ग्रह की परिक्रमा करने वाले पिंड उपग्रह कहलाते हैं।

10. सौर परिवार में ग्रह, ग्रहों के उपग्रह, ग्रहिकायें, धूमकेतुएँ, उल्काएँ और उल्का पिंड सम्मिलित हैं।

11. सूर्य के ज्ञात ग्रह (क्रमशः दूरी अनुसार) हैं-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।

 सौर परिवार आकाश दर्शन

12. यम या प्लूटो को ग्रह की बिरादरी से बाहर कर दिया गया है क्योंकि यह छोटा व द्रव्यमान में कम तथा पूर्णतः गोल नहीं है। यह सूर्य की एक ही तल में परिक्रमा भी नहीं करता। इसे वामन ग्रह का दर्जा दिया गया है।

13. मंगल व बृहस्पति की कक्षाओं के बीच पाये जाने वाले पिंड जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं क्षुद्र ग्रह या ग्रहिका कहलाते हैं। 14. धूमकेतु या पुच्छलतारा छोटे खगोलीय पिंड जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं- छोटा, चमकदार, शीर्ष व लंबी पूँछ युक्त होता है।

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