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मेरा नया बचपन कक्षा 6 हिन्दी

मेरा नया बचपन

बार-बार आती है मुझको मधुर याद, बचपन तेरी ।

गया, ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी ||

चिंता रहित खेलना, खाना, वह फिरना निर्भय स्वच्छंद ।

कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद ||

ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआछूत किसने जानी ?

हुई थी अहा, झोपड़ी और चीथड़ों में रानी ॥

कि दूध के कुल्ले मैंने, चूस अँगूठा सुधा पिया।

किलकारी कल्लोल मचाकर सूना घर आबाद किया।

रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे ।

बड़े-बड़े मोती से आँसू, जयमाला पहनाते थे ।

मैं रोई, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया ।

झाड़-पोंछकर, चूम-चूम, गीले गालों को सुखा दिया ।

वह भोली सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप ।

क्या फिर आकर मिटा सकेगा, तू मेरे मन का संताप ?

तू आ जा बचपन ! एक बार फिर दे दे अपनी निर्मल शांति।

व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, अपनी वह प्राकृत विश्रांति ॥

मैं बचपन को बुला रही थी बोल उठी बिटिया मेरी । ।

नंदनवन – सी गूंज उठी, वह छोटी-सी कुटिया मेरी ।।
‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी, मिट्टी खाकर आई थी।

कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ में, मुझे खिलाने आई थी।

पुलक रहे थे अंग, दृगों में कौतूहल था छलक रहा ।

मुँह पर थी आलाद – लालिमा, विजय गर्व था झलक रहा ।

पाया मैंने बचपन फिर से, बचपन बेटी बन आया।

उसकी मंजुल मूर्ति देखकर मुझमें नवजीवन आया ॥

मैंने पूछा “यह क्या लाई ?” बोल उठी वह, “माँ काओ।”

हुआ प्रफुल्लित हृदय खुशी से, मैंने कहा – “तुम्हीं खाओ।”

मैं भी उसके साथ खेलती – खाती हूँ, तुतलाती हूँ।

मिलकर उसके साथ स्वयं मैं भी बच्ची बन जाती हूँ

जिसे खोजती थी बरसों से, अब जाकर उसको पाया।

भाग गया था मुझे छोड़कर, वह बचपन फिर से आया ।

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