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हिन्दी साहित्यकार

इस श्रेणी में हिन्दी भाषा के साहित्यकारों के जीवन परिचय, रचनाएँ , लेखन कला व साहित्य में स्थान के बारे में बताने का प्रयास किया गया है.

धनपाल का साहित्यिक परिचय

धनपाल अपभ्रंश कवि धनपाल ने भविसयत्त कहा (भविष्यदत्त कथा) नामक अपभ्रंश काव्य की रचना की है। उन्होंने अपने माता-पिता का नाम धनश्री एवं मातेश्वर प्रकट किया है। इनके रचनाकाल का समय १०वीं शती अनुमान किया गया है। भविसयत्त कहा काव्यरचना, बहुलता से पद्धडिया छंद के कडवकों और घत्ताओं में की गई है। यह चौपाई-दोहा-रूप काव्य का पूर्वरूप है।
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पुष्यदन्त का साहित्यिक परिचय

पुष्पदंत अपभ्रंश भाषा के महाकवि थे जिनकी तीन रचनाएँ प्रकाश में आ चुकी हैं- 'महापुराण', 'जसहरचरित' (यशोधरचरित) और 'णायकुमारचरिअ' (नागकुमारचरित)। इन ग्रंथों की उत्थानिकाओं एवं प्रशस्तियों में कवि में अपना बहुत कुछ वैयक्तिक परिचय दिया है। पुष्यदन्त का साहित्यिक परिचय इसके अनुसार पुष्पदंत काश्यपगोत्रीय ब्राह्मण थे। उनके पिता केशवभट्ट और माता
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स्वयंभू का साहित्यिक परिचय

स्वयंभू स्वयंभू, अपभ्रंश भाषा के महाकवि थे। स्वयंभू के पिता का नाम मारुतदेव और माता का पद्मिनी था। कवि ने अपने रिट्ठीमिचरिउ के आरंभ में भरत, पिंगल, भामह और दण्डी के अतिरिक्त बाण और हर्ष का भी उल्लेख किया है, जिससे उनका काल ई. की सातवीं शती के मध्य के पश्चात् सिद्ध होता है। स्वयंभू का उल्लेख पुष्पदन्त ने अपने महापुराण में किया है, जो ई. सन्
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मत्स्येन्द्रनाथ का साहित्यिक परिचय

मत्स्येन्द्रनाथ अथवा मचिन्द्रनाथ 84 महासिद्धों (बौद्ध धर्म के वज्रयान शाखा के योगी) में से एक थे। वो गोरखनाथ के गुरु थे जिनके साथ उन्होंने हठयोग विद्यालय की स्थापना की। उन्हें संस्कृत में हठयोग की प्रारम्भिक रचनाओं में से एक कौलजणाननिर्णय के लेखक माना जाता है। गोरखनाथ को उनके सबसे सक्षम शिष्यो मे माना जाता है।
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गोरखनाथ का साहित्यिक परिचय

गोरखनाथ या गोरक्षनाथ जी महाराज प्रथम शताब्दी के पूर्व नाथ योगी के थे. गुरु गोरखनाथ जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया और अनेकों ग्रन्थों की रचना की। रचनाएँ डॉ॰ बड़थ्वाल की खोज में निम्नलिखित 40 पुस्तकों का पता चला था, जिन्हें गोरखनाथ-रचित बताया जाता है। डॉ॰ बड़थ्वाल ने बहुत छानबीन के बाद इनमें प्रथम 14 ग्रंथों को असंदिग्ध रूप से प्राचीन माना,
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दलपति विजय का साहित्यिक परिचय

दलपति विजय दलपति विजय भारतीय कवि था, जिसे खुमान रासो का रचयिता माना गया है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में लिखा है कि "शिवसिंह सरोज के कथानुसार एक अज्ञात नामाभाट ने 'खुमान रासो' नामक ग्रन्थ लिखा था, जिसमें श्रीरामचंद्र से लेकर खुमान तक के युद्धों का वर्णन था।
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चंदरबरदाई का साहित्यिक परिचय

चंदरबरदाई का साहित्यिक परिचय चंदबरदाई (जन्म: संवत 1205 तदनुसार 1148 ई० लाहौर वर्तमान पाकिस्तान में - मृत्यु: संवत 1249 तदनुसार 1192 ई० गज़नी) हिन्दी साहित्य के आदिकालीन कवि तथा पृथ्वीराज चौहान के मित्र थे। उन्होने पृथ्वीराज रासो नामक प्रसिद्ध हिन्दी ग्रन्थ की रचना की। चंदबरदाई का जन्म लाहौर में एक राव भट्ट परिवार में हुआ
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सुन्दरदास का साहित्यिक परिचय

सुन्दरदास का जन्म जयपुर राज्य की प्राचीन राजधानी दौसा में रहने वाले खंडेलवाल वैश्य परिवार में चैत्र शुक्ल 9, सं. 1653 वि. को हुआ था। माता का नाम सती और पिता का नाम परमानंद था। ६ वर्ष की अवस्था में ये प्रसिद्ध संत दादू के शिष्य बने और उन्हीं के साथ रहने भी लगे। दादू इनके अद्भुत रूप को देखकर इन्हें 'सुंदर' कहने लगे थे। इनका स्वर्गवास कार्तिक
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वल्लभाचार्य का साहित्यिक परिचय

श्रीवल्लभाचार्यजी को वैश्वानरावतार (अग्नि का अवतार) कहा गया है। वे वेदशास्त्र में पारंगत थे। वर्तमान में इसे वल्लभसम्प्रदाय या पुष्टिमार्ग(pushtimarg) सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है। और वल्लभसम्प्रदाय वैष्णव सम्प्रदाय अन्तर्गत आते हैं। वल्लभाचार्य का साहित्यिक परिचय श्रीवल्लभाचार्यजी (1479-1531) का प्रादुर्भाव विक्रम संवत् 1535, वैशाख
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रामानंद का साहित्यिक परिचय

रामानन्दी सम्प्रदाय (बैरागी सम्प्रदाय) के प्रवर्तक रामानन्दाचार्य का जन्म सम्वत् 1236 में हुआ था।रामानन्द जी के पिता का नाम पुण्यसदन और माता का नाम सुशीला देवी था।  श्री रामानंद मध्ययुगीन उदार चेतना के जन्मदाता, भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक, तथा तत्कालीन धार्मिक तथा समाजिक चेतना के मार्गदर्शक थे। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक जीवन धारा को
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