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काव्यशास्त्र

‘काव्यशास्त्र’ काव्य और साहित्य का दर्शन तथा विज्ञान है। यह काव्यकृतियों के विश्लेषण के आधार पर समय-समय पर उद्भावित सिद्धान्तों की ज्ञानराशि है। काव्यशास्त्र के लिए पुराने नाम ‘साहित्यशास्त्र’ तथा ‘अलंकारशास्त्र’ हैं और साहित्य के व्यापक रचनात्मक वाङ्मय को समेटने पर इसे ‘समीक्षाशास्त्र’ भी कहा जाने लगा। संस्कृत आलोचना के अनेक अभिधानों में अलंकारशास्त्र ही नितान्त लोकप्रिय अभिधान है। इसके प्राचीन नामों में ‘क्रियाकलाप’ (क्रिया काव्यग्रंथ; कल्प विधान) वात्स्यायन द्वारा निर्दिष्ट 64 कलाओं में से अन्यतम है। राजशेखर द्वारा उल्लिखित “साहित्य विद्या” नामकरण काव्य की भारतीय कल्पना के ऊपर आश्रित है, परन्तु ये नामकरण प्रसिद्ध नहीं हो सके।

साहित्य में विविध वाद

साहित्य में विविध वाद उत्तर आधुनिकतावादअति यथार्थवादअस्तित्ववादसरंचनावादकलावादप्रतीकवादमिथकमनोविश्लेषण वादविखंडनवादस्वछंदतावादरुपवाद
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संस्कृत आलोचना के प्रमुख आचार्य

संस्कृत आलोचना के प्रमुख आचार्य sanskrit-aacharya भरतमुनि भामह दण्डी वामन उद्भट रूद्रट आनंद वर्धन अभिनव गुप्त कुन्तक कुन्तक क्षेमेंद्र विश्वनाथ जगन्नाथ
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पाश्चात्य काव्यशास्त्री और उनकी रचनायें

पाश्चात्य काव्यशास्त्री और उनकी रचनायें प्लेटोगणतन्त्रअरस्तुपोयटिक्स , पेरिपोइटिकेसलोंजाइन्सपेरिइप्सुसक्रोचेएस्थेटिकवड्सवर्थलिरिकल बेलेडस, ऐन इवनिंग वॉक ऐंड डिस्क्रिप्ट स्केचेज, द प्रिल्यूडसिमोन द बुआद सेकंड सेक्सकॉलरिज–पोयम्स,द फ्रेंड,एड्स टू रिफ्लेक्शन,चर्च एंड स्टेट,कंफेशन् ऑफ़ एन इंक्वायरिंग स्पिरिटइलियटद वेस्टलैंड,ऐसेज एशेंट एंड
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