हिंदी का प्रथम कवि किसे माना जाए?

हिंदी का प्रथम कवि किसे माना जाए? इसे अलग अलग भाषाशास्त्री में अलग अलग मत है :-

डॉ शिव सिंह सेंगर के अनुसार,

सातवीं सदी में उत्पन्न ‘पुष्य’ या ‘पुंड’ नामक किसी कवि को हिंदी का प्रथम कवि माना था. परंतु अभी तक उसकी कोई रचना उपलब्ध नहीं हुई है .

राहुल सांकृत्यायन के अनुसार,

सातवीं शताब्दी में सरहपाद को हिंदी का प्रथम कवि माना है. वह 84 सिद्धों में एक थे.

सरहपाद के प्रथम कवि होने 3 आधार

  • इनकी कविता में अपभ्रंश का साहित्यिक रूप छूट गया है.
  • सरहपाद की  काव्य परंपरा में विकसित नाथ पंथ का हठयोग कबीर के काव्य का आधार है.
  • तीसरा आधार शैली की परंपरा का है.  सरहपाद ने दोहा और पदों की शैली अपने कविता में प्रयुक्त की है.

डॉ गणपति चंद्र गुप्त के अनुसार,

अपने “हिंदी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास” में  भरतेश्वर बाहुबली रास के रचयिता ‘साली भद्र सूरी’ को हिंदी का प्रथम कवि माना है . जो तर्क सम्मत नहीं है.सरहपाद  की भाषा अपेक्षाकृत हिंदी के अधिक निकट है, इसलिए हिंदी को हिंदी का प्रथम कवि माना जाता है

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