छत्तीसगढ़ में भौगोलिक सूचना प्रणाली

इस पोस्ट में आप छत्तीसगढ़ में भौगोलिक सूचना प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे यदि कहीं पर आपको त्रुटिपूर्ण लगे तो कृपया पोस्ट के नीचे कमेंट बॉक्स पर लिखकर हमें सूचित करने की कृपा करें

छत्तीसगढ़ में भौगोलिक सूचना प्रणाली

राज्य सरकार के संस्थान चिप्स द्वारा भौगोलिक सूचना प्रणाली परियोजना पर कार्य किया गया है, जिसमें भू-अभिलेख नक्शा, टोपोग्राफी, भूमि के उपयोग, भूमि की जल निकासी, मिट्टी की किस्म, भूमि की उर्वरता, सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति, वन, जंगल, जल संग्रहण, खनिज, खदान एवं जनसंख्या संबंधी डेटा का संग्रहण किया जा रहा है। इस प्रणाली में 37 लेयर्स हैं, जिसमें से अधिकांश लेयर्स का कार्य पूर्ण हो चुका है।

राज्य की भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग अनेक विभागों द्वारा किया गया है, जिसमें से मुख्य विभाग इस प्रकार हैं –

1. नया रायपुर विकास प्राधिकरण

2. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

3. राज्य निर्वाचन आयोग

4. नगर एवं ग्राम निवेश

5. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

6. वन विभाग

7. उद्योग एवं खनिज विभाग

8. पुलिस विभाग

9. उद्यानिकी विभाग

10. भू-अभिलेख विभाग

11. राजस्व विभाग

12. कृषि विश्वविद्यालय

13. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

14. लोक निर्माण विभाग

इसके अतिरिक्त राज्य में निवेश करने वाले उद्यमियों को उनकी मांग के अनुसार जी.आई.एस.नक्शों के प्रिन्ट सशुल्क उपलब्ध कराये जाते हैं।

पटवारी नक्शों का कम्प्यूटरीकरण

1. भौगोलिक सूचना प्रणाली के अन्तर्गत ग्राम की भूमि का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। राज्य में कुल 20007 ग्राम ऐसे हैं जिनके नक्शे उपलब्ध हैं। इसमें से दंतेवाड़ा जिले के कुछ ग्रामों को छोड़कर राज्य के सभी ग्रामों का कार्य पूर्ण हो चुका है।

2. इन नक्शों को अद्यतीकरण किया जा सके इस हेतु आई.आई.टी.कानपुर से सॉफ्ट्वेयर तैयार कराया गया है, जिससे राज्य में किसी भी स्थान से इन नक्शों को अद्यतन किया जा सकता है।

3. जलग्रहण विकास परियोजना – पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संचालित जलग्रहण परियोजना विकसीत करने के लिये भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग किया गया है। जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जी.आई.एस. लेयर्स जैसे- एडमिनिस्ट्रेटिव बाउन्डरी, लैंड यूज/लैंड कव्हर, सॉइल, स्लोप तथा अन्य लेयर्स इस परियोजना के विकास के लिये पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को प्रदाय की जा रही है।

4. सड़क सूचना प्रणाली – 1.50000 के स्केल में टोपोशीट वार सड़कों से संबंधित सूचना प्रणाली लोक निर्माण विभाग को उपयोग हेतु दिया गया है।

भौगोलिक सूचना प्रणाली की विशेषताएं

1. छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य जिसने 37 लेयर्स पर भौगोलिक सूचना प्रणाली का क्रियान्वयन किया है।

2. देश में सर्वप्रथम राज्य के सभी गांवों की भूमि के नक्शों का जियो रेफरेंस के साथ डिजिटलीकरण किया है।

3. राज्य के विभिन्न विभागों के लिये भू-अभिलेख नक्शा, टोपोग्राफी, भूमि के उपयोग, जल निकासी, मिट्टी की किस्म, भूमि की उर्वरता, सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति, वन, जल ग्रहण, खनिज, खदान एवं जनसंख्या संबंधी डेटा का संग्रहण किया गया है।

4. भू-स्वामियों को उनकी भूमि के नक्शों की कम्प्यूटरीकृत प्रतिलिपी देने की प्रणाली का विकास किया है ।

5. देश में सर्वप्रथम छत्तीसगढ ने भूमि के बटवारे को नक्शों पर अपडेट करने का ऑनलाईन साफ्टवेयर तैयार किया है।

6. ग्रमीण सड़क योजना और वन विभाग की कार्य योजना इसी प्रणाली पर तैयार की गयी है।

7. पंचायतों एवं नगरी निकायों की सीमा का निर्धारण इसी प्रणाली पर किया गया।

8. नया रायपुर की योजना इसी प्रणाली पर तैयार की गई।

9. राज्य के विभिन्न विभागों में भौगोलिक सूचना प्रणाली पर कार्य करने हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दक्ष  किया गया है।

स्रोत: राज्य सरकार का सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग

इन्हें भी पढ़ें :

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण चॉइस सेण्टर
छत्तीसगढ़ राज्य में भौगोलिक सूचना प्रणाली
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना
छत्तीसगढ़ सरकार की ई-क्लास रुम योजना
छत्तीसगढ़ स्टेट डेटा सेन्टर
छत्तीसगढ़ में सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं की नीति

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!