छत्तीसगढ़ी गहने

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छत्तीसगढ़ के जनजातियों के प्रमुख आभूषण

  1. लुरकी – यह कानों में पहना जाता है, जो पीतल, चांदी, तांबे आदि धातुओं का बना होता है. इसे कर्ण फूल, खिनवा आदि भी कहा जाता है.
  2. करधन – चांदी गिलट या नकली चांदी से बना यह वजनी आभूषण छत्तीसगढ़ के प्रायः सभी जनजाति की महिलाओं व्दारा कमर में पहना जाने वाला आभूषण है. इसे करधनी भी कहते है.
  3. सूतिया – गले में पहना जाने वाला यह आभूषण ठोस गोलाई में एल्यूमिनियम, गिलट, चांदी, पीतल आदि का होता है.
  4. पैरी – पैर में पहना जाता है, गिलट यया चांदी का होता है. इसे पैरपटटी, तोड़ा या सांटी भी कहा जाता है. कहीं-कहीं इसका नाम लच्छा भी है.
  5. बांहूटा – बांह में स्त्री पुरूष दोनो व्दारा पहना जाने वाला यह आभूषण अकसर चांदी या गिलट का होता है. इसे मैना जनजाति में पहुंची भी कहा जाता है. भुंजिया इसे बनौरिया कहते है.
  6. बिछियां – पैर की उंगलियों में पहना जाता है. यह चांदी का होता है. इस का अन्य नाम चुटकी बैगा जनजाति में अपनाया जाता है.
  7. ऐंठी – यह कलाई में पहना जाने वाला आभूषण है, जो कि चांदी, गिलट आदि से बनाया जाता है. इसे ककना और गुलेठा भी कहा जाता है.
  8. बन्धा – गले में पहना जाने वाली यह सिक्कों का माला होती है, पुराने चांदी के सिक्कों की माला आज भी आदिवासी स्त्रियों की गले की शोभा है.
  9. फुली – यह नाक में पहना जाता है, चांदी, पीतल या सोने का भी होता है, इसे लौंग भी कहा जाता है.
  10. धमेल – गले में पहना जानेवाला यह आभूषण चांदी या पीतल अथवा गिलट का होता है. इसे सरिया व हंसली भी कहा जाता है.
  11. नागकोरी – यह कलाई में पहना जाता है.
  12. खोंचनी – यह सिर के बालों में लगाया जाता है. बस्तर में मुरिया, माडि़या आदिवासी इस लकड़ी से तैयार करते हैं. अनेक स्था नों पर चांदी या गिलट का तथा कहीं पत्थर भी प्रयोग किया जाता है. बस्तर में प्लास्टिक कंघी का भी इस्तेमाल इस आभूषण के रूप में होता है. इसे ककवा कहा जाता है.
  13. मुंदरी – यह हाथ में उंगलि‍यों पहना जाने वाला धातु निर्मित आभूषण है, बैगा जनजाति की युवतियां इसे चुटकी भी कहती है.
  14. सुर्डा/सुर्रा – यह गले में पहना जाता है. गिलट या चांदी निर्मित यह आभूषण छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की एक पहचान है.

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