छत्तीसगढ़ में मौर्य मौर्य एवं सातवाहन काल व गुप्त वंश

छत्तीसगढ़ में मौर्य मौर्य एवं सातवाहन काल व गुप्त वंश

ह्मवेनसांग, प्रसिद्ध चीनी यात्री का यात्रा विवरण पढ़ने पर हम देखते हैं कि अशोक, मौर्य सम्राट, ने यहाँ बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया था। सरगुजा जिले में उस काल के दो अभिलेख मिले हैं जिससे यह पता चला है कि दक्षिण-कौसल (छत्तीसगढ़) में मौर्य शासन था, और शासन-काल 400 से 200 ईसा पूर्व के बीच था। ऐसा कहते हैं कि कलिंग राज्य जिसे अशोक ने जीता था और जहाँ युद्ध-क्षेत्र में अशोक में परिवर्तन आया था, वहां का कुछ भाग छत्तीसगढ़ में पड़ता था। छत्तीसगढ़ में मौर्यकालीन अभिलेख मिले हैं। ये अभिलेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं।

मौर्य के बाद भारत में चार प्रमुख राजवंशों का आविर्भाव हुआ –

  1. मगध राज्य में शुंगों का उदय
  2. कलिंग राज्य में चेदि वंश
  3. दक्षिण पथ में सातवाहन
  4. पश्चिम भाग में दूसरे देश का प्रभाव

मौर्य एवं सातवाहन काल


मौर्यकालीन लेखों से पता चलता है इस क्षेत्र में मौयो का प्रभुत्व रहा है, परवर्ती बुद्धकाल में यह क्षेत्र पहलेनंदवंश एव बाद में मौर्यवंश के अधीन रहा, ह्वेनसांग के विवरण एवं सरगुजा जिले की सीताबेंगरा गुफाओं और जोगीमारा गुफाओं के मौर्यकालीन लेखों में इन सभी का स्पष्ट जानकारी मिलती है।
इस क्षेत्र में मौर्यकालीन् अधीनता का स्पष्ट पाता चलता है, यहाँ से मौर्य कालीन आहत सिक्कों की प्राप्ति हुई हैै और पकी ईटों एवं उत्तरी काले पालिशदर बर्तनों के अवशेष से मौर्थकालीन् के स्पष्ट जानकारी मिले हैै।
इस क्षेत्र बिलासपुर से सातवाहन कालीन सिक्के प्राप्त हुए जो कि मौर्यो के पश्चात प्रतिष्ठान या पैठन ( महाराष्ट्र क्षेत्र ) के सातवाहन वंश का इस क्षेत्र में शासन रहा।
ह्वेनसांग के विवरण के अनुसार दार्शनिक नागार्जुन दक्षिण कौशल की राजधानी के निकट निवास करता था। बाद में संभवत : मेघवंश ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया।
सातवाहन के पश्चात् वाकाटकों का अभ्युदय हुआ, वाकाटक शासक प्रवरसेन प्रथम ने दाक्षिण कोसल के समूचे क्षेत्र पर अपना धिकार स्थापित कर लिया।
प्रवरसेन के आश्रय में कुछ समय भारत के प्रसिद्ध कावि कालिदास रहे थे।


5) गुप्तकाल


गुप्त सम्राट ( 4 सदी ई० ) के दखारी कवि हीरषेण की प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त के दक्षिण भारत के धर्मविजय अभियान का उल्लेख है, इस अभियान के दौरान समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोसल के शासक महेन्द्र एवं महाकान्तार ( बस्तर क्षेत्र ) के शासक व्याघ्रराज को परास्त किया, पर इस क्षेत्र का गुप्त साम्राज्य में विलय नहीं किया गया।

गुप्त कालीन सिक्कों प्राप्त हुए बानरद ( जि . दुर्ग ) एवं आरंग ( जि. रायपुर ) इस प्रकार से यह स्पष्ट होता है यहाँ के क्षेत्रीय शासकों ने गुप्तवंश का प्रभुत्व स्वीकार कर लिया था।

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