किशोरावस्था कक्षा 8 वीं विज्ञान अध्याय 17

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • 11 वर्ष से 19 वर्ष तक की आयु की अवधि किशोरावस्था कहलाती है।
  • किशोरावस्था या यौवनारम्भ होने पर व्यक्ति जनन में सक्षम हो जाता है।
  • यौवनारम्भ का प्रारंभ होने पर जनन अंगों में वृद्धि होती है तथा शरीर के विभिन्न स्थानों पर बाल आने लगते हैं। लड़कियों में स्तन विकसित हो जाते हैं तथा लड़कों के चेहरे पर दाढ़ी आती हैं। स्था में स्वरयंत्र की वृद्धि होने के कारण लड़कों की आवाज फटने लगती है।
  • किशोरावस्था में लंबाई में वृद्धि होती है।
  • यौवनारम्भ एवं जनन अंगों का परिपक्व होना हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होता है।
  • हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ है जो रुधिर में सीधे पहुँचते हैं।
  • टेस्टोस्टेरॉन नर हॉर्मोन है तथा एस्ट्रोजन मादा हॉर्मोन है। गर्भाशय की दीवार निषेचित अंडाणु (युग्मनज) को ग्रहण करने के लिए अपने आपको तैयार करती है। निषेचन न होने की स्थिति में गर्भाशय की दीवार की आंतरिक सतह टूटकर शरीर से बाहर रक्त के साथ प्रवाहित हो जाती है। इसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म कहते हैं।
  • अजन्मे शिशु का लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि युग्मनज में XX गुणसूत्र है अथवा XY गुणसूत्र
  • किशोरावस्था में संतुलित आहार लेना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना महत्वपूर्ण है।
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